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देहरादून: पुष्कर सिंह धामी खुद खटीमा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे, लेकिन सत्ता में पार्टी की वापसी कराने में कामयाब रहे। पार्टी के लिए पसीना बहाने का ईनाम भी उन्हें मिल गया है। बीजेपी ने धाकड़ धामी पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें विधायक दल का नेता चुना है। अब उन्हें छह महीने के भीतर चुनाव लड़ना है। धामी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए बीजेपी के पांच नवनिर्वाचित विधायकों ने सीट छोड़ने का ऐलान किया था, अब इनसे संपर्क साधा जा रहा है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पिथौरागढ़ जिले की डीडीहाट या चंपावत सीट से उप चुनाव लड़ सकते हैं। डीडीहाट उनके पैतृक गांव वाली सीट है। बीजेपी यहां से लगातार चुनाव जीतती रही है। इसी तरह चंपावत सीट खटीमा से लगी है। इनके अलावा कपकोट और लालकुआं सीट भी उनके लिए मुफीद मानी जा रही है।
कपकोट पुष्कर धामी के राजनीतिक गुरु भगत सिंह कोश्यारी की परंपरागत सीट रही है। बता दें कि सीएम धामी के लिए बीजेपी से चंपावत विधायक कैलाश गहतोड़ी, लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, जागेश्वर विधायक मोहन सिंह महरा, रुड़की के विधायक प्रदीप बत्रा और कपकोट से सुरेश गड़िया ने सीट छोड़ने की पेशकश की है। इनके अलावा खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने भी धामी के लिए सशर्त अपनी सीट छोड़ने का ऐलान किया था। बीजेपी के पास एक और ऑप्शन है। राज्य सभा के लिए उत्तराखंड कोटे की एक सीट इसी साल जुलाई में खाली हो रही है। ऐसे में बीजेपी किसी विधायक को राज्य सभा भेजकर मुख्यमंत्री के उप चुनाव के लिए सीट का इंतजाम कर सकती है। डीडीहाट के विधायक बिशन सिंह चुफाल या कालाढूंगी के विधायक बंशीधर भगत को राज्यसभा भेजकर इन सीटों पर उप चुनाव कराया जा सकता है। इन तमाम विकल्पों के अलावा बीजेपी किसी कांग्रेस विधायक को मनाकर उसकी सीट खाली कराने का भी प्रयास कर रही है।