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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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देहरादून: भारत में कोरोना ने एक बार फिर से दस्तक दे दी है और एक बार फिर से कोरोना तेजी से अपने पांव पसारता हुआ नजर आ रहा है जो कि एक बुरी खबर है।
ओमिक्रोन के वेरिएंट एक्सई ने भारत में एक बार फिर से हाहाकार मचा दिया है। इस वेरिएंट के संक्रमण की दर ओमिक्रोन से भी दुगनी है और यह उससे भी दुगनी तेजी से फैलता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि ओमिक्रोन ने जितने लोगों को अपनी चपेट में लिया था इस बार उनकी संख्या 2 गुना अधिक हो सकती है। उत्तराखंड में भी हाल बुरे हैं। उत्तराखंड में भी तेजी से केस बढ़ रहे हैं जो कि एक बुरा संकेत है ऐसा माना जा रहा है कि मई में उत्तराखंड में ओमिक्रोन के वेरिएंट एक्सई के मामले तेजी से सामने आ सकते हैं। इस बार बच्चों में संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों को कोरोना की चौथी लहर और संक्रंमण से बचाना एक बड़ी चुनौती है। वहीं एम्स ऋषिकेश ने जून से जुलाई के बीच में संक्रमण के चरम काल में पहुंचने की आशंका जताई है। हालांकि तीसरी वेव की तरह ही इस बार भी यह संक्रमण घातक साबित नहीं होगा मगर उसके बावजूद भी इसका इतनी तेजी से बढ़ना चिंताजनक है। वहीं टीकाकरण होने से लोगों में इम्यूनिटी भी बनी हुई है इसीलिए उत्तराखंड समेत पूरे देश में कोरोना तेजी से फैलने के बावजूद भी लोगों में संक्रमित होने के बाद सर्दी जुकाम जैसी मामूली लक्षण ही नजर आ रहे हैं। आगे पढ़िए
गंभीर रूप से बीमार और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को Coronavirus XE variant संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। इसीलिए गंभीर बीमारी, कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों और बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए कोरोना के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल के नोडल अधिकारी डॉक्टर संतोष कुमार ने बताया वैक्सीन का लगना संक्रमण ना होने की गारंटी नहीं है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन से संक्रमण के गंभीर लक्षणों से सुरक्षा तो मिलती है मगर टीका लगने के बाद भी लोग संक्रमित हो सकते हैं। इसीलिए मास्क पहनना, शारीरिक दूरी का पालन करना और हाथों को सैनिटाइज करने जैसे नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है। हमारी भी आप से अपील है कि Coronavirus XE variant को बिल्कुल हल्के में ना लें। अपने बच्चों को संक्रमण से बचाएं और उनको मास्क पहनने, शारीरिक दूरी और सैनिटाइजेशन जैसे सुरक्षा नियमों को लेकर जागरूक करें।