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Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
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रुद्रप्रयाग: पहाड़ में इन दिनों हर जगह आपदा जैसे हालात दिख रहे हैं। मानसूनी बारिश कहर बरपा रही है। नदियां-गदेरे उफान पर हैं तो वहीं सड़कें बंद होने की वजह से कई गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।
हाल ये है कि खेतों से काम कर लौट रहे स्थानीय लोग सड़क खोलने में लगी जेसीबी मशीन की बकेट में बैठकर किसी तरह सड़क पार कर रहे हैं। जेसीबी मशीन जैसे ही मलबा साफ कर रही है, पानी के बहाव के साथ दोबारा मलबा आ रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली चेतावनी दी है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार आज से अगले तीन दिन प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी वर्षा होने की संभावना है। इसे लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। अन्य जिलों में गरज के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका के चलते सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
राजधानी देहरादून में भी शुक्रवार से लगातार बारिश जारी है। चौक-चौराहे जलमग्न हो गए हैं। कई दुकानों और घरों में पानी घुसने की खबर है। मसूरी मार्ग पर गलोगी के पास मलबा आने से आवाजाही ठप हो गई थी। देर रात तक वाहन चालक सड़कों पर फंसे रहे। देर रात तक भी यातायात पूरी तरह सुचारू नहीं हो सका था। कुमाऊं के पिथौरागढ़ जिले में 25 मार्ग बंद हैं। तवाघाट-लिपुलेख मार्ग पर मलबा आने से चीन सीमा का संपर्क कट गया है। मल्ली बाजार धारचूला में भूस्खलन के डर से 40 परिवारों को घर छोड़ना पड़ा है। इन लोगों को केएमवीएन के विश्राम गृह में ठहराया गया है। बागेश्वर जिले में 10 और नैनीताल जिले में 11 सड़कें बंद पड़ी हैं। भूस्खलन और बोल्डर आने से प्रदेश में 186 से ज्यादा सड़कों पर ट्रैफिक बाधित है। वाहन चालकों को एहतियात के साथ चलने के लिए कहा गया है।