उत्तराखंड: यहां बाघों की रक्षा करेंगे हाथी, 1 साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद संभाली जिम्मेदारी

मानसून काल में कॉर्बेट नेशनल पार्क में शिकारियों की घुसपैठ बढ़ जाती है। ऐसे में जंगल के राजा बाघ की सुरक्षा का दायित्व अलबेली और आशा को दिया गया है।
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uttarakhand elephant tiger protection: Elephants will protect tigers in Corbett National Park
Image: Elephants will protect tigers in Corbett National Park

हरिद्वार: देशभर में बाघों को बचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चल रहा है। बाघ के अस्तित्व के लिए असली खतरा चालाक और आधुनिक हथियारों से लैस आदमी है।

Elephants will protect tigers in Corbett National Park

इंसान प्राचीन काल से ही बाघों का शिकार अपने ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाने, वस्त्र बनाने, हड्डियों से औषधीय सामग्री बनाने और टोने-टोटके के लिए करते आए हैं, जिस वजह से आज बाघों का अस्तित्व खतरे में है। मानसून काल में कॉर्बेट नेशनल पार्क में भी शिकारियों की गतिविधियां बढ़ जाती है। ऐसे में अब जंगल के राजा बाघ की सुरक्षा का दायित्व अलबेली और आशा को दिया गया है। दोनों एक्सपर्ट हाथी हैं, जो कि मानसून काल में जंगल की निगरानी में वनकर्मियों की मदद कर रहे हैं। आशा और अलबेली जैसी एक्सपर्ट हथिनियों और हाथियों की टीम उन जगहों पर भी आसानी से पहुंच जाती है, जहां कर्मचारी नहीं पहुंच पाते। बीते दिनों एनटीसीए से आए हाई अलर्ट के बाद इस बार हाथियों की जिम्मेदारी बढ़ गई हैं। अलबेली और आशा की टीम में शिवगंगे, कपिला, गंगा और गजराज समेत कुल 12 सदस्य हैं। सालभर आराम करने वाली हाथियों की टीम को इन दिनों कॉर्बेट नेशनल पार्क की 6 रेंज की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। टीम की सदस्य अलबेली की मां पवन परी ने भी काफी साल तक जंगल की सुरक्षा में योगदान दिया। कुछ साल पहले उसकी मौत हो गई थी। अब बेटी अलबेली भी कॉर्बेट के बड़े अभियानों में शामिल होती है। आगे पढ़िए

हथिनी आशा और अलबेली में गहरी दोस्ती है और दोनों साथ ही रहती हैं। दोनों स्थानीय होने के कारण जंगल के बारे में पूरी जानकारी रखती हैं। महावत के एक इशारे पर दोनों काम शुरू कर देती हैं। जबकि कर्नाटक से लाए गए अन्य हाथियों को करीब 1 साल का प्रशिक्षण दिया गया है। शिकारियों पर नजर रखने के लिए सभी हाथी कर्मचारियों को पीठ पर लेकर करीब 180 से 200 किलोमीटर तक गश्त कर रहे हैं। दरअसल शिकारी मानसून काल का फायदा उठाकर जंगल में घुसपैठ की फिराक में रहते हैं। साल 2012 में शिकारियों ने जंगल में घुसकर एक बाघ को मार दिया था। इस घटना के बाद से संवेदनशील इलाकों में हाथियों से गश्त शुरू करवाई गई। उन्हें सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा के साथ सभी श्रेणियों में गश्त की जिम्मेदारी दी गई है। रेंजर बिंदरपाल सिंह ने बताया कि कॉर्बेट पार्क करीब एक हजार 318 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, यहां 250 से ज्यादा बाघ हैं। जंगल के भीतर ऐसे कई इलाके हैं, जहां बरसात के मौसम में इंसान का पहुंचना मुश्किल है, ऐसे में हाथियों की मदद लेनी पड़ती है। यूपी से सटी सीमा ज्यादा संवेदनशील है, यहां कई बार संदिग्धों को घुसपैठ करते पकड़ा गया है। बाघों की सुरक्षा को देखते हुए 6 रेंज में 600 से ज्यादा कर्मचारी रोज 625 किलोमीटर चलकर जंगल की निगरानी कर रहे हैं। हाथियों और कर्मचारियों से रोजाना 800 किलोमीटर क्षेत्र में गश्त कराई जा रही है। पार्क में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। हाथियों से चार्ट के मुताबिक गश्त कराई जा रही है।