उत्तराखंड के पुराने बाजारों को पुनः विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए रि-डेवलपमेंट नीति पर कार्य शुरू कर दिया गया है।
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Image: Old Markets to redeveloped with new policy
देहरादून: प्रदेश के ज्यादातर शहरों के बाजारों में वाहन ले जाना कठिन है। इन बाजारों का विकास पीपीपी मोड में किया जाएगा। इस संबंध में नीति जल्द ही कैबिनेट में प्रस्तुत की जाएगी।
Old Markets to redeveloped with new policy, 3 Major Cities to Start with
उत्तराखंड के व्यस्त और पुराने बाजारों को सरकार नए सिरे से संवारने की योजना बना रही है। इसके लिए एक रि-डेवलपमेंट नीति तैयार की जा रही है, जो जल्द ही कैबिनेट में पेश होगी। इसके बाद पीपीपी मोड के तहत इन बाजारों का पुनर्विकास किया जाएगा। देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल समेत कई शहरों में ऐसे बाजार हैं जहां सड़कें संकीर्ण हैं, वाहन प्रवेश की अनुमति नहीं है और पार्किंग की कमी है। अब इन बाजारों को आधुनिक रूप में पुनर्निर्मित किया जाएगा, जहां एक या दो मंजिला दुकानों की जगह पार्किंग और आधुनिक कांप्लेक्स बनाए जाएंगे। इससे बाजारों की सुंदरता बढ़ेगी और शॉपिंग अनुभव को आरामदायक बनाया जाएगा।
पुनर्विकास की ये है योजना
पुनर्विकास योजना में कई मुख्य विशेषताएँ शामिल हैं, जिन्हें इन पुराने बाजारों को 21वीं सदी में लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
बुनियादी ढाँचे का उन्नयन: इस योजना में आधुनिक सुविधाओं का निर्माण शामिल है, जैसे कि अच्छी तरह से डिज़ाइन की गई दुकानें, बेहतर स्वच्छता और बेहतर प्रकाश व्यवस्था। जल निकासी, अपशिष्ट प्रबंधन और पार्किंग से संबंधित मुश्किलें जो इनमें से कई बाजारों में लंबे समय से रही हैं।
ट्रांसपोर्ट में सुधार: इन बाजारों को सभी के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए, पुनर्विकास योजना में चौड़े पैदल मार्ग, दिव्यांगों के लिए रैंप और बेहतर सार्वजनिक परिवहन लिंक जैसी सुविधाएँ शामिल की जाएँगी। इन सुधारों से बाजारों को स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए अधिक समावेशी और नेविगेट करने में आसान बनाने की उम्मीद है।
सौंदर्य में सुधार:योजना में इन बाजारों को बेहतर भूनिर्माण, साइनेज और स्ट्रीट फ़र्नीचर के साथ सुंदर बनाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। इसका लक्ष्य जीवंत, आकर्षक स्थान बनाना है जो आधुनिक डिज़ाइन मानकों को पूरा करते हुए उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हों।
सुरक्षा और संरक्षा: सुरक्षा उपायों को बढ़ाने की आवश्यकता को समझते हुए, पुनर्विकास में सुरक्षित खरीदारी वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे, अग्नि सुरक्षा प्रणाली और अन्य सुरक्षा सुविधाएँ स्थापित करना शामिल होगा।
पर्यावरण संरक्षण पर काम: योजना में सतत विकास प्रथाओं पर जोर दिया गया है, जैसे कि पर्यावरण के अनुकूल सामग्री, ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था और जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग। सरकार का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वाले हरित बाजारों के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करना है।
कार्यान्वयन और समयसीमा
इस परियोजना के अगले कुछ वर्षों में लागू होने की उम्मीद है, जिसमें पहला चरण देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जैसे शहरों के प्रमुख बाजारों पर केंद्रित होगा। उत्तराखंड सरकार ने पुनर्विकास के लिए चरणबद्ध योजना तैयार की है, जिसमें उन बाजारों को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें अपग्रेड की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
नए बाजारों के पुनर्विकास से लाभ
बाजारों के पुनर्विकास से भीड़ नियंत्रण को आसान बनाया जाएगा और व्यापारियों को बेहतर स्पेस उपलब्ध होगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता में सुधार होगा। वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी और सड़कों की चौड़ाई भी बढ़ाई जाएगी, जिससे यातायात की समस्या हल होगी। इसके अतिरिक्त ग्राहक और व्यापारियों को बाजारों में मूलभूत और अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, जैसे शौचालय की सुविधा जो कई पुराने बाजारों में अब तक उपलब्ध नहीं है। इन सुधारों से बाजारों की संपूर्ण कार्यक्षमता और सौंदर्य में वृद्धि होगी।