वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक मेहरा उच्च न्यायालय की स्थापना के समय से यहां वकील के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें सिविल सेवा, राजस्व और संवैधानिक मामलों में व्यापक अनुभव प्राप्त है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Alok Mehra appointed as new judge of Nainital High Court
नैनीताल: जनपद नैनीताल के वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक मेहरा को उत्तराखंड उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद उनकी नियुक्ति के संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। आलोक मेहरा ने इस न्यायालय में लंबे समय तक वकालत की है और उन्हें संवैधानिक मामलों में व्यापक अनुभव प्राप्त है।
Alok Mehra appointed as new judge of Nainital High Court
वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक मेहरा उच्च न्यायालय की स्थापना के समय से यहां वकील के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें सिविल सेवा, राजस्व और संवैधानिक मामलों में व्यापक अनुभव प्राप्त है। बीते बुधवार 12 फरवरी की शाम को जनपद नैनीताल के वरिष्ठ अधिवक्ता मेहरा को उत्तराखंड उच्च न्यायालय का न्यायाधीश घोषित किया गया है। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने इसकी मंजूरी दे दी है, जिसके बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं।
नियुक्ति के लिए उच्चतम न्यायालय की कॉलेजियम ने वरिष्ठ अधिवक्ता मेहरा की अक्टूबर 2023 में सिफारिश की थी, लेकिन उनकी नियुक्ति में 15 महीने की देरी हुई। अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद, उनके न्यायाधीश बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस संदर्भ में यह संभावना है कि वे अगले शुक्रवार को न्यायाधीश पद की शपथ ले सकते हैं।
भीमताल के मेहरा गाँव के हैं मूल निवासी
अधिवक्ता आलोक मेहरा नैनीताल जिले के भीमताल स्थित मेहरा गांव के मूल निवासी हैं और वर्तमान में तल्लीताल में रहते हैं। आलोक मेहरा का जन्म 1972 में नैनीताल में हुआ, और उनका परिवार न्यायिक तथा शैक्षिक क्षेत्र से संबंधित रहा है। उनके पिता, स्वर्गीय गोपाल सिंह मेहरा, ने 63 वर्षों तक नैनीताल जिला अदालत में वकालत की। वे उत्तराखंड बार काउंसिल के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। आलोक महरा की माता, धना देवी, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज धारचूला से प्रधानाचार्य के रूप में सेवानिवृत हुई।
अगले शुक्रवार ले सकते हैं न्यायाधीश पद की शपथ
अधिवक्ता आलोक मेहरा ने नैनीताल के सेंट जोसेफ कॉलेज से अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी की। उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज नैनीताल से इंटरमीडिएट करने के बाद एमबी पीजी कॉलेज हल्द्वानी से स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने वर्ष 1998 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से विधि स्नातक की डिग्री प्राप्त की और 1999 में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में अपना पंजीकरण कराया। संभावना है कि वे अगले शुक्रवार को न्यायाधीश पद की शपथ ले सकते हैं।