Kedarnath Yatra: गौरीकुंड में तप्तकुंड का हुआ पुनरुद्धार, फिर बहने लगी गर्म पानी की निर्मल धारा

केदारनाथ यात्रा 2025 की तैयारियों के चलते तप्तकुंड का पुनरुद्धार कर दिया गया है। केदारनाथ विधानसभा की विधायक आशा नौटियाल ने बीते फरवरी महीने में गौरीकुंड का निरीक्षण कर तप्तकुंड में जमे मलबे उसका पुनर्निर्माण करने के निर्देश दिए थे...
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Tapt Kund in Gaurikund: Revival of Tapt Kund in Gaurikund
Image: Revival of Tapt Kund in Gaurikund

रुद्रप्रयाग: गौरीकुंड में स्थित तप्तकुंड का पुनर्निर्माण किया जा चुका चुका है। तप्तकुंड में फिर से गर्म पानी का प्रवाह शुरू हो गया है, अब श्रद्धालु यात्रा केदरनाथ के दौरान तप्तकुंड में आचमन और स्नान कर सकेंगे। यात्रा के दौरान इस स्थान को और अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

Revival of Tapt Kund in Gaurikund

गौरतलब हो कि, बीते वर्ष 31 जुलाई को केदारनाथ पैदल मार्ग पर अतिवृष्टि से मंदाकिनी के सैलाब से तप्तकुंड मलबे और बोल्डरों से दब गया था। अब केदारनाथ यात्रा 2025 की तैयारियों के चलते इस तप्तकुंड का भी पुनरुद्धार कर दिया गया है। केदारनाथ विधानसभा की विधायक आशा नौटियाल ने बीते फरवरी महीने में गौरीकुंड का निरीक्षण कर तप्तकुंड में जमे मलबे उसका पुनर्निर्माण करने के निर्देश दिए थे।

विधायक आशा नौटियाल लगाए 15 लाख रुपए

विधायक आशा नौटियाल ने इसके लिए अपनी विधायक निधि से 15 लाख रुपए दिए, और खंड विकास कार्यालय ऊखीमठ को तप्तकुंड पुनरुद्धार की जिम्मेदारी सौंपी थी। बीडीओ अनुष्का के निर्देशन और जेई संदीप थपलियाल के नेतृत्व में 30 श्रमिकों ने एक महीने के भीतर तल से ढाई मीटर ऊँचाई तक जमा मलबा और बोल्डरों को साफ किया, जिससे तप्तकुंड को पुनर्जीवित हो गया। मलबा हटाने के बाद, इसमें गर्म पानी की धारा फिर से प्रवाहित होने लगी है।

स्नान और तर्पण करते हैं श्रदालु

खंड विकास कार्यालय के जेई संदीप थपलियाल ने जानकारी दी कि अब गौरीकुंड स्थित तप्तकुंड सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि यात्रा प्रारंभ होने से पहले तप्तकुंड क्षेत्र को और अधिक सुरक्षित बनाने के प्रयास किए जाएंगे। केदारनाथ यात्रा के प्रमुख पड़ाव गौरीकुंड में तप्तकुंड और तर्पण कुंड स्थित हैं। श्रद्धालु इन कुंडों में स्नान करने के साथ-साथ अपने पूर्वजों को तर्पण भी अर्पित करते हैं। तप्तकुंड के पानी को यहां बनाने गए तालाब में इकट्ठा किया जा रहा है, ताकि इसमें यात्री स्नान कर सकेंगे।