चमोली: शीतकाल के लिए बंद हुए बदरीनाथ मंदिर के कपाट, अगले 6 माह यहां होंगे दर्शन

चमोली में बदरीनाथ धाम के कपाट आज पूरे रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए हैं। अब अगले 6 महीने भगवान बदरीनाथ की पूजा इंसान नहीं स्वयं देवताओं द्वारा की जाएगी..
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Badrinath doors closed: Badrinath temple doors are closed for winter season
Image: Badrinath temple doors are closed for winter season

चमोली: आज 25 अक्टूबर को विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट पूरे विधि विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। मंदिर के कपाट बंद होने के अवसर पर हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे और धाम “जय बदरीविशाल” के जयकारों से गूंज उठा।

Badrinath temple doors are closed for winter season

बदरीनाथ धाम के कपाट आज मंगलवार दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के अवसर पर हजारों श्रद्धालु धाम में उपस्थित रहे और पूरा परिसर “जय बदरीविशाल” के जयकारों से गूंज उठा। कपाट बंद किए जाने से पहले मंदिर को लगभग 10 क्विंटल फूलों से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर मनमोहक दिखाई दे रहा था।

गर्भग्रह में विराजेंगी माता लक्ष्मी

कपाट बंद होने से पहले सोमवार को पंच पूजाओं के अंतर्गत माता लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजा और कढ़ाई भोग का आयोजन किया गया। बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी (रावल) अमरनाथ नंबूदरी ने माता लक्ष्मी को शीतकाल के लिए बदरीनाथ गर्भगृह में विराजमान होने हेतु आमंत्रित किया। धार्मिक परंपरा अनुसार, बदरीनाथ के कपाट खुलने के बाद माता लक्ष्मी छह माह तक परिक्रमा स्थल स्थित अपने मंदिर में विराजमान रहती हैं। लेकिन कपाट बंद करने से पूर्व रावल उन्हें गर्भगृह में आमंत्रित करते हैं, जहाँ वे शीतकाल की अवधि तक विराजमान मानी जाती हैं।

योगध्यान बदरी मंदिर में शीतकालीन दर्शन

बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद अब धाम में गणेश मंदिर, आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल के कपाट भी बंद कर दिए गए हैं। इसके साथ ही मंदिर में वेद ऋचाओं का वाचन भी शीतकालीन अवधि के लिए रोक दिया जाता है। बदरीनाथ मंदिर शीतकाल के लिए बंद होने पर भगवान बदरी विशाल की मूर्ति को पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बदरी मंदिर लाया जाता है। यहीं भगवान बदरी नारायण का शीतकालीन निवास स्थान है। 1200 साल से भी पुराना योगध्यान बदरी मंदिर इस अवधि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल बन जाता है।