नैनीताल के मंगोली क्षेत्र में पुलिस ने व्यावसायिक गैस सिलिंडरों से भरी पिकअप पकड़ी, चालक फरार हो गया। परिजनों ने पुलिस पर उत्पीड़न और अवैध वसूली के आरोप लगाए। पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Pickup with Gas Cylinders Seized in Nainital
नैनीताल: नैनीताल जिले के मंगोली क्षेत्र में सोमवार रात पुलिस की नियमित चेकिंग के दौरान एक बड़ा मामला सामने आया। करीब रात आठ बजे पुलिस ने एक संदिग्ध पिकअप वाहन (यूके 04 सीसी 1896) को रोककर जांच की। जांच के दौरान वाहन में 25 व्यावसायिक गैस सिलिंडर पाए गए। जब पुलिस ने चालक से इन सिलिंडरों के वैध दस्तावेज मांगे, तो वह कोई स्पष्ट कागजात पेश नहीं कर सका।
Pickup with Gas Cylinders Seized in Nainital
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पूछताछ के दौरान चालक अचानक मौके से फरार हो गया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में सिलिंडर बरामद होने के बावजूद चालक का भाग निकलना सुरक्षा में चूक माना जा रहा है।
चालक के फरार होने से उठे सवाल
चालक का पुलिस की मौजूदगी में फरार होना पूरे मामले का सबसे विवादित पहलू बन गया है। आमतौर पर इस तरह की कार्रवाई में सख्त निगरानी रखी जाती है, लेकिन इस घटना में ऐसा नहीं हो सका। स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यह पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है। इस घटना के बाद पुलिस की सतर्कता और चेकिंग अभियान की गंभीरता पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब यह जांच का विषय बन गया है कि आखिर चालक किस परिस्थिति में और कैसे मौके से भागने में सफल रहा।
खाद्य पूर्ति विभाग ने संभाला मामला
घटना की सूचना मिलने के बाद मंगलवार को कोतवाली पुलिस और खाद्य पूर्ति विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेते हुए पिकअप वाहन को तुरंत सीज कर दिया। साथ ही बरामद किए गए सभी 25 गैस सिलिंडरों को कब्जे में लेकर खाद्य पूर्ति विभाग को सौंप दिया गया। यह कार्रवाई आवश्यक वस्तुओं की निगरानी और नियंत्रण के तहत की गई, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी प्रकार की अवैध सप्लाई को रोका जा सके।
परिजनों ने लगाए उत्पीड़न और वसूली के आरोप
मामले में नया मोड़ तब आया जब चालक के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। चालक के परिजन जितेंद्र कुमार ने दावा किया कि सिलिंडरों की सप्लाई पूरी तरह वैध थी। उनके अनुसार, काशीपुर से सिलिंडरों का गेट पास शाम चार बजे ही जारी कर दिया गया था और यह सप्लाई नैनीताल के स्कूलों और होटलों के लिए भेजी जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना पूरी जानकारी के कार्रवाई की और उत्पीड़न के साथ-साथ अवैध वसूली की कोशिश भी की। इन आरोपों के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है और अब यह केवल एक जब्ती की घटना नहीं, बल्कि विवाद का रूप ले चुका है।
SOP के समय को लेकर बढ़ा विवाद
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू एसओपी (Standard Operating Procedure) के समय को लेकर भी सामने आया है। जिला प्रशासन द्वारा रात नौ बजे नई एसओपी जारी की गई थी, जबकि पिकअप वाहन इससे पहले ही रवाना हो चुका था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या वाहन पुराने नियमों के तहत चल रहा था या नई एसओपी का उल्लंघन हुआ। यह स्थिति पूरे मामले को और उलझा देती है और प्रशासनिक समन्वय पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
गैस एजेंसी पर पहले भी लग चुके हैं आरोप
क्षेत्रीय खाद्य पूर्ति अधिकारी सुरेंद्र बिष्ट के अनुसार, यह पिकअप नेहा इंडेन गैस एजेंसी की है, जो पहले भी इस तरह के मामले में पकड़ी जा चुकी है। अधिकारी ने बताया कि इस बार भी सिलिंडरों को अवैध मानते हुए जब्त कर लिया गया है। एजेंसी का पुराना रिकॉर्ड होने के कारण विभाग इस मामले को गंभीरता से देख रहा है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज
खाद्य पूर्ति विभाग ने इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब आगे की जांच में यह तय किया जाएगा कि सिलिंडरों की सप्लाई वैध थी या नहीं और दस्तावेजों की कमी वास्तविक थी या प्रशासनिक गलती। साथ ही पुलिस पर लगाए गए आरोपों की भी जांच की जाएगी, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
नैनीताल का यह मामला कई सवालों को जन्म देता है। एक ओर पुलिस अवैध गैस सिलिंडर परिवहन के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन इसे वैध सप्लाई बताते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। अब इस पूरे प्रकरण की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल यह मामला प्रशासन, पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास और पारदर्शिता की परीक्षा बन गया है।