Uttarakhand News: उत्तराखंड में कक्षा 1 के एडमिशन के लिए आयु सीमा में बदलाव से 4000 बच्चों के दाखिले पर संकट। सरकारी और निजी स्कूलों के अलग-अलग नियमों से बढ़ा भ्रम।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Uttarakhand School Admission Rule Confusion Puts Students at Risk
देहरादून: उत्तराखंड में कक्षा 1 में प्रवेश को लेकर शिक्षा विभाग की दोहरी नीति ने बड़ा भ्रम पैदा कर दिया है। आयु गणना की तिथि में अचानक बदलाव के कारण अभिभावक और निजी स्कूल संचालक असमंजस में हैं। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब नया नियम शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद लागू किया गया, जबकि अधिकांश स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी।
Uttarakhand School Admission Rule Confusion Puts Students at Risk
राज्य में सरकारी और निजी स्कूलों के लिए अलग-अलग आयु मानक लागू होने से विवाद और बढ़ गया है। सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 में प्रवेश के लिए 30 जून तक छह वर्ष की आयु मान्य की गई है, जबकि निजी स्कूलों के लिए 1 अप्रैल तक छह वर्ष की आयु अनिवार्य बताई जा रही है। एक ही राज्य में दो अलग-अलग नियम होने से शिक्षा व्यवस्था की एकरूपता पर सवाल उठ रहे हैं। इस फैसले का सबसे बड़ा असर कुमाऊं के शिक्षा केंद्र Haldwani में देखने को मिल रहा है। यहां 300 से अधिक निजी स्कूल प्रभावित हुए हैं और करीब 4000 बच्चों के दाखिले पर संकट मंडरा रहा है। जिन बच्चों का प्रवेश पहले ही हो चुका था, अब उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। आगे पढ़िए
पहले जारी हुए आदेश और उसके आधार पर प्रवेश
समग्र शिक्षा उत्तराखंड द्वारा पहले जारी निर्देशों में कक्षा 1 के लिए 30 जून तक छह वर्ष की आयु निर्धारित की गई थी। इसी आधार पर फरवरी 2026 में जिला स्तर पर आदेश जारी हुए और स्कूलों ने प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली। अभिभावकों ने भी इन्हीं नियमों को ध्यान में रखते हुए अपने बच्चों का दाखिला कराया था। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का हवाला देते हुए कक्षा 1 में प्रवेश के लिए 1 अप्रैल तक छह वर्ष की आयु अनिवार्य बताई जा रही है। इस बदलाव ने पहले से हुए दाखिलों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अचानक लिए गए इस निर्णय से अभिभावक और स्कूल दोनों ही परेशान हैं।
RTE प्रवेश प्रक्रिया भी प्रभावित
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 24 मार्च से अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरी हो चुकी थी। अभिभावकों ने 30 जून की आयु सीमा के अनुसार आवेदन किया था, लेकिन अब नए नियम लागू होने से इन प्रवेशों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश भगत ने कहा कि पहले 30 जून के आधार पर प्रवेश कराए गए और अब नियम बदल दिया गया, जिससे बच्चों का भविष्य अधर में है। वहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार 1 अप्रैल की तिथि लागू होती है। इस पूरे मामले में अब एक समान और स्पष्ट नीति की मांग तेज हो गई है, ताकि अभिभावकों और बच्चों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।