देहरादून हॉस्पिटल अग्निकांड: मां की दम घुटने से हुई मौत, बेबस होकर रोता रहा बेटा; सुनाई दुखद कहानी

उस समय आईसीयू का गलियारा सिर्फ एक वार्ड नहीं था, बल्कि टूटती उम्मीदों और घुटती सांसों की दर्दनाक तस्वीर बन चुका था। धुएं से भरे माहौल में लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। हर तरफ डर, बेचैनी और असहायता का माहौल था।
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Hospital ICU fire news: ICU Fire Triggers Panic in Dehradun Panacea Hospital
Image: ICU Fire Triggers Panic in Dehradun Panacea Hospital

देहरादून: पैनेसिया हॉस्पिटल में सुबह का माहौल सामान्य था और अस्पताल के आईसीयू में मरीजों का इलाज चल रहा था। तभी करीब साढ़े नौ बजे के आसपास अचानक वार्ड में आग लग गई और देखते ही देखते धुआं पूरे आईसीयू में फैल गया। कुछ ही देर में वहां अफरा-तफरी मच गई, मरीजों और परिजनों में दहशत फैल गई तथा पूरा वार्ड चीख-पुकार और घबराहट के माहौल में बदल गया।

ICU Fire Triggers Panic in Dehradun Panacea Hospital, One Patient Dies

देहरादून के डोईवाला स्थित पैनेसिया हॉस्पिटल में आग लगने के बाद बिजली गुल हो गई और घने धुएं ने पूरे आईसीयू को अपनी गिरफ्त में ले लिया। हालात इतने खराब हो गए कि लोगों को कुछ दिखाई देना बंद हो गया और सांस लेना तक मुश्किल हो गया। घटना के दौरान अस्पताल में मौजूद कांवली गांव निवासी कमल की आंखों के सामने वह भयावह मंजर आज भी ताजा है। उनकी 50 वर्षीय मां वीरवती आईसीयू में भर्ती थीं, जो कि दो दिन पहले शुगर अनियंत्रित होने के कारण गिर गई थीं और गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
कमल बताते हैं कि सुबह करीब साढ़े नौ बजे अचानक आईसीयू में आग लग गई। देखते ही देखते पूरा वार्ड धुएं से भर गया। उस समय कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। धुआं इतना ज्यादा था कि सांस लेना मुश्किल हो गया था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अपनी मां को सुरक्षित बाहर कैसे निकालें।

शीशे तोड़कर बाहर निकाले गए मरीज

उन्होंने आगे बताया कि स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल स्टाफ और लोगों ने आईसीयू के शीशे तोड़कर मरीजों को बाहर निकालना शुरू किया। अस्पताल में भगदड़ जैसे हालात बन गए। परिजन धुएं और अफरा-तफरी के बीच अपने अपनों को खोजते नजर आए। हर किसी के चेहरे पर डर और बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच कमल की मां वीरवती जिंदगी की जंग हार गईं और उन्होंने दम तोड़ दिया। आगे पढ़िए..

“हर तरफ सिर्फ चीखें और डर था”

मंगलौर निवासी सदाकत खान के पिता खान बहादुर भी उसी आईसीयू में भर्ती थे। घटना के समय सदाकत नीचे मौजूद थे, तभी अचानक अस्पताल स्टाफ की आवाजें सुनाई देने लगीं। यह आवाजें आईसीयू में आग लगने और धुआं भरने की चेतावनी थीं। कुछ ही देर में अस्पताल में अफरातफरी मच गई और लोगों ने मरीजों को बचाने के लिए दौड़ लगानी शुरू कर दी। मरीजों को शीशे तोड़कर बाहर निकाला गया, जबकि परिजन धुएं के बीच अपने परिवार के लोगों को तलाशते रहे।

ICU का गलियारा बना दर्द की तस्वीर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उस समय आईसीयू का गलियारा सिर्फ एक वार्ड नहीं था, बल्कि टूटती उम्मीदों और घुटती सांसों की दर्दनाक तस्वीर बन चुका था। धुएं से भरे माहौल में लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। हर तरफ डर, बेचैनी और असहायता का माहौल था।

अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

फायर सेफ्टी व्यवस्था पर्याप्त थी या नहीं
इमरजेंसी निकासी के इंतजाम कितने मजबूत थे
धुएं से बचाव के उपाय क्यों नाकाफी साबित हुए
इन सभी मुद्दों को लेकर प्रशासन अब जांच की बात कर रहा है।