उत्तराखंड में बेरहम शिकारियों का घिनौना काम, दो बाघों को बेरहमी से मारा; पैर काटकर ले गए

हरिद्वार की श्यामपुर रेंज में दो बाघों को जहर देकर मारने और उनके पैर काटने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वन विभाग ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है जबकि बाघिन की तलाश के लिए बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
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Haridwar tiger poaching case: Two tigers brutally killed by poachers in Uttarakhand
Image: Two tigers brutally killed by poachers in Uttarakhand

हरिद्वार: वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज से बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जंगल में दो बाघों के शव मिलने से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में हड़कंप मच गया। शिकारियों ने कथित तौर पर दोनों बाघों को जहर देकर मार डाला और फिर बेरहमी से उनके चारों पैर काट लिए।

Two tigers brutally killed by poachers in Uttarakhand

वन विभाग के अनुसार, मारे गए दोनों बाघ लगभग दो वर्ष के थे, जिनमें एक नर और एक मादा बाघ शामिल है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि शिकारियों ने बाघों को मारने के लिए जहरीले पदार्थ का इस्तेमाल किया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रविवार शाम करीब साढ़े छह बजे सजनपुर बीट, श्यामपुर कम्पार्टमेंट संख्या-09 में सर्च ऑपरेशन के दौरान एक बाघ का शव बरामद हुआ। मौके पर एक मृत भैंस भी पाई गई। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मृत भैंस पर जहरीला पदार्थ छिड़क दिया था। जब बाघ ने भैंस का मांस खाया तो उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने बाघ के चारों पैर काट दिए और अवैध बाजार में बेचने की तैयारी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि आरोपी शव को जंगल में छोड़कर मौके से फरार हो गए।

एक आरोपी गिरफ्तार, तीन अभी फरार

कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने आलम उर्फ फम्मी निवासी गुज्जर डेरा, श्यामपुर को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के बाद मंगलवार शाम एक अन्य मादा बाघ का शव भी घटनास्थल से लगभग 150 मीटर दूर बरामद किया गया। इस मादा बाघ के भी पैर काटे गए थे। मामले में आमिर हमजा उर्फ मियां, आशिक और जुप्पी निवासी गुर्जर बस्ती, श्यामपुर अभी फरार बताए जा रहे हैं। वन विभाग उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रहा है। आगे पढ़िए..

वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन अब मारे गए बाघों की मां यानी बाघिन की तलाश में जुट गया है। अधिकारियों को आशंका है कि बाघिन अभी भी आसपास के जंगलों में मौजूद हो सकती है। बाघिन की लोकेशन ट्रेस करने के लिए जंगल के संवेदनशील इलाकों में 10 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इसके अलावा करीब 50 वनकर्मियों और अधिकारियों की टीम लगातार जंगल में सर्च ऑपरेशन चला रही है। वन विभाग के मुताबिक, दोनों बाघ अभी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हुए थे और संभवतः अपनी मां के साथ ही विचरण कर रहे थे। आगे पढ़िए..

चीला रेंज में सबसे ज्यादा बाघ

राजाजी टाइगर रिजर्व के आंकड़ों के अनुसार रिजर्व में कुल 51 बाघ हैं, जिनमें सबसे अधिक बाघ चीला रेंज में पाए जाते हैं। चीला रेंज श्यामपुर क्षेत्र से सटी हुई है। वन विभाग का कहना है कि हरिद्वार वन प्रभाग के कई इलाकों में आने वाले बाघ भी अधिकतर राजाजी टाइगर रिजर्व से ही आते हैं। इसी बीच कॉर्बेट नेशनल पार्क के झिरना रेंज से भी चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां दो पालतू मादा हाथी रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। पार्क प्रशासन का अनुमान है कि दोनों हाथी जंगली हाथियों के झुंड के साथ कहीं चले गए होंगे। घंटों तलाश के बावजूद देर रात तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया। ये दोनों हाथी जंगल में गश्त के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।

वन्यजीव सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

हरिद्वार में दो बाघों की हत्या और उनके अंग काटे जाने की घटना ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।<>वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो शिकारियों के हौसले और बढ़ सकते हैं। वहीं वन विभाग ने मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।