Uttarakhand News: दो बाघों की हत्या मामले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, श्यामपुर रेंजर विनय कुमार राठी सस्पेंड

हरिद्वार की श्यामपुर रेंज में दो बाघों की संदिग्ध मौत के मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। वन विभाग ने रेंजर विनय कुमार राठी को निलंबित कर दिया है। NTCA भी मामले की जांच कर सकती है। जानिए पूरा मामला।
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Haridwar Tiger Poaching Case: Big Action in Uttarakhand Forest Department After Tiger Death Case
Image: Big Action in Uttarakhand Forest Department After Tiger Death Case

हरिद्वार: Uttarakhand Forest Department ने हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज में दो बाघों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रेंजर विनय कुमार राठी को निलंबित कर दिया है।

Big Action in Uttarakhand Forest Department After Tiger Death Case

प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) उत्तराखंड द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है। यह मामला अब राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

Tiger Poaching Case in Haridwar: क्या है पूरा मामला?

दरअसल, हाल ही में Shyampur Range की सजनपुर बीट में दो बाघों के शव मिलने से पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया था। शुरुआती जांच में यह मामला शिकार का निकला। जांच एजेंसियों को संदेह है कि शिकारियों ने बाघों को जहर देकर मारा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृत बाघों के पंजे काटकर ले जाए गए, जिससे वन्यजीव तस्करी की आशंका और मजबूत हो गई है। वन विभाग ने मामले में एक आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जबकि बाद में तीन अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की गई। हालांकि कुछ आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।

Ranger Vinay Kumar Rathi Suspended

Vinay Kumar Rathi को 25 मई 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। आदेश के अनुसार यह कार्रवाई उत्तरांचल सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 2003 के तहत की गई है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें हरिद्वार वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल की संस्तुति के बाद यह फैसला लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद हरिद्वार से लेकर देहरादून तक वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आगे पढ़िए..

सूत्रों के अनुसार जांच में क्षेत्रीय स्तर पर गश्त व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और वन्यजीव सुरक्षा में गंभीर खामियां सामने आ सकती हैं। बीते कुछ महीनों में हरिद्वार वन प्रभाग लगातार वन्यजीव अपराधों और सुरक्षा में लापरवाही को लेकर विवादों में रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने National Tiger Conservation Authority (NTCA) का भी ध्यान खींचा है। NTCA की टीम जल्द उत्तराखंड पहुंच सकती है और पूरे मामले की विस्तृत जांच कर सकती है।

संगठित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क

विशेषज्ञों का मानना है कि मामला केवल बाघों की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की ओर भी संकेत कर सकता है। वन विभाग अब तक बाघों के कटे हुए पंजे बरामद नहीं कर पाया है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रही हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघों के पंजे और अन्य अंगों की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में भारी मांग होती है, जिसके चलते शिकारियों द्वारा इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है।
Uttarakhand में लगातार बढ़ते वन्यजीव अपराधों ने जंगल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी तंत्र को मजबूत नहीं किया गया, तो राज्य में बाघ संरक्षण अभियान को बड़ा नुकसान हो सकता है।