उत्तरकाशी के भद्रासू गांव की 19 वर्षीय महक चौहान ने ताशकंद में आयोजित सीएएसए महिला रग्बी टूर्नामेंट में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीतकर उत्तराखंड और भारत का नाम रोशन किया। उन्होंने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 9 ट्राई स्कोर किए।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Mehak Wins Player of the Tournament Award at International Rugby Championship
उत्तरकाशी: उत्तराखंड के सीमांत जनपद Uttarkashi के मोरी ब्लॉक के भद्रासू गांव की 19 वर्षीय महक चौहान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। उज्बेकिस्तान की राजधानी Tashkent में आयोजित सीएएसए महिला रग्बी टूर्नामेंट में महक को "प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट" चुना गया। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उत्तरकाशी बल्कि पूरे उत्तराखंड में खुशी और गर्व का माहौल है।
Mehak Wins Player of the Tournament Award at International Rugby Championship
महक चौहान की सफलता की कहानी संघर्ष, समर्पण और अथक मेहनत का बेहतरीन उदाहरण है। सीमांत क्षेत्र के एक साधारण परिवार से आने वाली महक ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। उनके भीतर आगे बढ़ने का जुनून और लक्ष्य हासिल करने की जिद ने उन्हें आज अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
महक की शुरुआती रुचि एथलेटिक्स में थी। उन्होंने Maharana Pratap Sports College में एक वर्ष तक एथलेटिक्स का प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान एक महिला रग्बी खिलाड़ी ने उन्हें रग्बी खेल से परिचित कराया। बाद में रग्बी कोच Ayush Saini ने उन्हें खेल की तकनीकी बारीकियां सिखाईं। यहीं से महक का रुझान रग्बी की ओर बढ़ता गया और उन्होंने इस खेल को अपना करियर बनाने का फैसला किया। आगे पढ़िए..
अंडर-18 से लेकर सीनियर भारतीय टीम तक का सफर
महक ने वर्ष 2023 में अपना पहला अंडर-18 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला। शानदार प्रदर्शन के चलते उनका चयन अंडर-20 एशिया रग्बी चैंपियनशिप के लिए हुआ। अपनी तेज रफ्तार, फिटनेस और शानदार खेल कौशल के दम पर महक उत्तराखंड की पहली खिलाड़ी बनीं, जिन्हें भारतीय सीनियर महिला रग्बी टीम में जगह मिली।
बीते 16 से 17 मई तक ताशकंद में आयोजित सीएएसए महिला रग्बी टूर्नामेंट में महक चौहान ने असाधारण प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में सर्वाधिक नौ ट्राई स्कोर किए और प्रतियोगिता की सबसे सफल स्कोरर बनीं। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें "प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट" के सम्मान से नवाजा गया। हालांकि भारतीय टीम पदक जीतने से चूक गई, लेकिन महक सहित टीम के अन्य खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन ने भविष्य के लिए उम्मीदों को मजबूत किया है।
शिक्षक पिता और गृहिणी मां की बेटी ने बढ़ाया मान
महक चौहान के पिता Arvind Chauhan भद्रासू के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां Kala Devi गृहिणी हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली महक आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। महक चौहान का कहना है कि रग्बी में सफलता के लिए फिटनेस, स्पीड और ताकत सबसे महत्वपूर्ण होती है। एथलेटिक्स का प्रशिक्षण उन्हें रग्बी में काफी मददगार साबित हुआ। महक ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा एशियन गेम्स और ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में भारत के लिए पदक जीतना है।
महक चौहान की सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सीमांत गांव से निकलकर भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया जा सकता है।