टिहरी गढ़वाल के भिलंगना ब्लॉक के जखन्याली गांव में बादल फटने जैसी आपदा से निपटने के लिए व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। प्रशासन, एसडीआरएफ और विभिन्न विभागों ने राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया।
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Image: Disaster Mock Drill Held in Tehri Garhwal
टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड में मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए टिहरी गढ़वाल के भिलंगना ब्लॉक के जखन्याली गांव में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य बादल फटने जैसी आपदा की स्थिति में प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियों का परीक्षण करना था। मॉक ड्रिल में प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन टीम और अन्य संबंधित विभागों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।
Disaster Mock Drill Held in Tehri Garhwal
एसडीएम घनसाली मंजू राजपूत ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान जखन्याली गांव में बादल फटने की काल्पनिक घटना दर्शाई गई। इस परिदृश्य में भारी मलबा आने से यातायात बाधित होने की स्थिति बनाई गई, ताकि राहत एवं बचाव दल वास्तविक परिस्थितियों की तरह अभ्यास कर सकें।
दो मृत और 12 घायल होने का बनाया गया परिदृश्य
अभ्यास के दौरान दो लोगों की मौत और 12 लोगों के घायल होने का काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया। राहत एवं बचाव दल ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल दो लोगों को प्राथमिक उपचार देने के बाद हायर सेंटर रेफर करने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया। आगे पढ़िए..
मलबे में दबे पशुओं को भी सुरक्षित निकाला
मॉक ड्रिल में यह भी दर्शाया गया कि कई पशु मलबे में दब गए हैं। एसडीआरएफ के जवानों ने विशेष रेस्क्यू उपकरणों की सहायता से पशुओं को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया। इस दौरान राहत टीमों ने घटनास्थल पर समन्वय बनाते हुए बचाव कार्यों को तेजी से पूरा किया। इस मॉक ड्रिल में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अभ्यास के दौरान आपसी समन्वय, त्वरित राहत कार्य, घायलों का सुरक्षित रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग का परीक्षण किया गया।
आपदा के समय तैयारियों को मजबूत करना है उद्देश्य
प्रशासन का कहना है कि ऐसे मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाना है। इससे संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है और किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलती है।