दून मेडिकल कॉलेज के मेस फीस घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी लेखाकार को निलंबित कर दिया गया है। निदेशालय की जांच में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद यह कदम उठाया गया।
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Image: Doon Medical College Mess Fee Scam Accountant Suspended
देहरादून: देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज (जीडीएमसी) में छात्रों की मेस फीस से जुड़े बहुचर्चित मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। निदेशालय स्तर पर हुई जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद मामले के मुख्य आरोपी माने जा रहे लेखाकार को निलंबित कर दिया गया है। करीब डेढ़ महीने पहले सामने आए इस मामले में यह पहली प्रमुख अनुशासनात्मक कार्रवाई मानी जा रही है।
Doon Medical College Mess Fee Scam: Accountant Suspended
जांच के अनुसार, एमबीबीएस 2022, 2023, 2024 और 2025 बैच के छात्रों से मेस शुल्क कॉलेज के अधिकृत खाते में जमा कराने के बजाय कथित रूप से मेस संचालक के निजी खातों में जमा कराया गया। आरोप है कि इसके लिए छात्रों को ऐसे क्यूआर कोड उपलब्ध कराए गए, जिन पर कॉलेज का नाम अंकित था। इससे कई छात्रों को यह आभास हुआ कि वे अधिकृत माध्यम से ही शुल्क जमा कर रहे हैं।
डिमांड ड्राफ्ट भी कराए गए वापस
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि छात्रों द्वारा कॉलेज के नाम से तैयार किए गए डिमांड ड्राफ्ट वापस कराए गए और उन्हें निरस्त करवाया गया। आरोप है कि यह प्रक्रिया लेखा अनुभाग के सहयोग से पूरी की गई, जिसके बाद छात्रों से अन्य माध्यम से शुल्क जमा कराया गया। आगे पढ़िए..
मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने अलग-अलग स्तरों पर जांच शुरू की। जांच के दौरान लेखा अनुभाग के कर्मचारियों, हॉस्टल वार्डनों और अन्य संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की गई। शुरुआती कार्रवाई के तहत लेखा अनुभाग के चार कर्मचारियों का तबादला किया गया था और सभी वार्डनों को भी बदल दिया गया था।
लेखाकार की सेवाएं समाप्त करने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, आरोपी लेखाकार उपनल (UPNL) के माध्यम से सेवाएं दे रहा था। निदेशालय के निर्देशों के बाद कॉलेज प्रशासन ने उपनल को पत्र भेजकर संबंधित लेखाकार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यदि आगे की जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रक्रियाओं की समीक्षा भी की जा रही है।