भराड़ीसैंण स्थित मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में जमीन खरीद-फरोख्त विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। एक ग्रामीण ने पुश्तैनी जमीन धोखे से बेचने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और 23 जुलाई को सुनवाई होगी।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Land Fraud Allegation Surfaces in CM Model Village Sarkot
चमोली: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में जमीनों की खरीद-फरोख्त का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पहले बड़े पैमाने पर भूमि बिक्री को लेकर विवाद सामने आया था, वहीं अब एक ग्रामीण ने अपनी पुश्तैनी जमीन धोखाधड़ी से बेचने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। शिकायत मिलने के बाद उपजिलाधिकारी गैरसैंण और तहसील प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Land Fraud Allegation Surfaces in CM Model Village Sarkot
सारकोट निवासी मदन सिंह ने उपजिलाधिकारी गैरसैंण और तहसीलदार को दिए शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी सहमति के बिना उनकी पुश्तैनी भूमि का सौदा कर दिया गया। शिकायत के अनुसार गोल खाता संख्या 93 में कुल 14 सह-खातेदार हैं, जिनमें मदन सिंह भी शामिल हैं। उनका कहना है कि भूमि बिक्री के दौरान सभी हिस्सेदारों की सहमति नहीं ली गई और नियमों की अनदेखी करते हुए गुपचुप तरीके से जमीन का विक्रय कर दिया गया। मदन सिंह का आरोप है कि 13 मई को रवि चौहान (अल्मोड़ा निवासी) और हरि सिंह (बागेश्वर निवासी) के नाम कुल 35 नाली भूमि की बिक्री की गई, जिसमें उनके खेत संख्या 663, 671 और 672 भी शामिल हैं। इन खेतों का क्षेत्रफल लगभग 12 नाली बताया गया है। उन्होंने प्रशासन से पूरे भूमि सौदे की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
23 जुलाई को होगी दाखिल-खारिज मामले की सुनवाई
तहसील प्रशासन के अनुसार भूमि की दाखिल-खारिज प्रक्रिया से पहले 23 जुलाई को दोनों पक्षों की सुनवाई की जाएगी। तहसीलदार गैरसैंण हरीश पांडे ने कहा "बेची गई भूमि से संबंधित दाखिल-खारिज की कार्रवाई से पहले 23 जुलाई को सुनवाई निर्धारित की गई है। शिकायतकर्ता और भूमि विक्रेताओं को बुलाया गया है। दोनों पक्षों की बात सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।" आगे पढ़िए..
पहले भी विवादों में रहा है सारकोट
गौरतलब है कि जून महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में चार काश्तकारों द्वारा करीब 35 नाली भूमि की बिक्री का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने बड़े पैमाने पर बाहरी लोगों को जमीन बेचने पर रोक लगाने की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन ने अपर जिलाधिकारी के नेतृत्व में जांच समिति का गठन किया था। हालांकि समिति की अंतिम रिपोर्ट अभी आना बाकी है।
ADM बोले— रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
जांच समिति के अध्यक्ष और अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश ने बताया कि जांच प्रक्रिया अभी जारी है। "मामले में जांच चल रही है। गैरसैंण तहसील से अंतिम तथ्य और अभिलेख प्राप्त होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। इसके बाद ही भूमि खरीद-फरोख्त की वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।"
सख्त भू-कानून के बावजूद उठ रहे सवाल
उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में राज्य में अनियंत्रित भूमि खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के उद्देश्य से सख्त भू-कानून लागू किया है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में भूमि बिक्री और अब कथित धोखाधड़ी के आरोप सामने आने से कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और 23 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जिससे इस बहुचर्चित मामले की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।