Nainital News: रामनगर में जाति छुपाकर बिना अनुमति जमीन बेचने के मामले में कलेक्टर ने सख्त फैसला सुनाया है। 1.170 हेक्टेयर भूमि को राज्य सरकार में निहित कर दिया गया। 1993 में हुआ यह सौदा जांच में अवैध पाया गया और इसे रद्द कर दिया गया।
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Image: Strict action against selling land by hiding caste in Nainital
रामनगर: नैनीताल जिले में प्रशासन ने अवैध भूमि हस्तांतरण के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। रामनगर के ढेला बंदोबस्ती गांव में जाति छुपाकर की गई जमीन बिक्री को अवैध करार देते हुए 1.170 हेक्टेयर भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया गया है। यह फैसला प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है।
Nainital News: Strict action against selling land by hiding caste
जानकारी के अनुसार, यह भूमि विक्रय वर्ष 1993 में किया गया था। जांच के दौरान यह सामने आया कि विक्रय विलेख (बैनामा) और मुख्तारनामे में विक्रेताओं की जाति का उल्लेख नहीं किया गया था, जो कि एक गंभीर तथ्य माना गया।
जांच में सामने आई सच्चाई
‘सरकार बनाम सीताराम आदि’ मामले की विस्तृत जांच में पता चला कि वर्ष 2013 में विक्रेताओं में से एक का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी हुआ था। इसके अलावा, परिवार रजिस्टर में भी संबंधित परिवार को अनुसूचित जाति श्रेणी में दर्ज पाया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार किसी व्यक्ति की जाति जन्म से और पिता की जाति के आधार पर निर्धारित होती है। इस आधार पर विक्रेताओं को अनुसूचित जाति का मानते हुए बिना अनुमति किया गया भूमि विक्रय अवैध घोषित किया गया।आगे पढ़िए..
कानून का उल्लंघन पाया गया
कलेक्टर ललित मोहन रयाल ने इस मामले को उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम (UPZALR Act) की धारा 157 का उल्लंघन माना। इस कानून के तहत अनुसूचित जाति की भूमि को बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के सामान्य वर्ग को बेचना अवैध है। अदालत ने 1.170 हेक्टेयर भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया है। साथ ही उपजिलाधिकारी रामनगर को निर्देशित किया गया है कि इस आदेश को तत्काल राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाए और जमीन का कब्जा सरकार के पक्ष में सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासन का सख्त संदेश
इस कार्रवाई को प्रशासन द्वारा अवैध भूमि हस्तांतरण के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगेगी और भूमि कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित होगा।