उत्तराखंड में साइबर हमलों के लिए हैकर्स छुट्टियों और कम ट्रैफिक वाले दिनों को निशाना बना रहे हैं। जानिए सरकारी वेबसाइटों पर हुए हमलों का ट्रेंड, आईटीडीए का बयान और विशेषज्ञों की राय।
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
Example Ads Media
Image: Uttarakhand Govt Websites Targeted by Cyber Attacks During Holidays
देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी वेबसाइटों पर साइबर हमलों का एक नया पैटर्न सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हैकर्स अब सरकारी छुट्टियों और सप्ताहांत (वीकेंड) के दिनों को निशाना बना रहे हैं, क्योंकि इन दिनों वेबसाइटों पर ट्रैफिक कम होता है और निगरानी भी अपेक्षाकृत सीमित रहती है। इससे साइबर अपराधियों के लिए अपने मंसूबों को अंजाम देना आसान हो जाता है।
Uttarakhand Govt. Websites Targeted by Cyber Attacks During Holidays
उत्तराखंड में अब तक हुए प्रमुख साइबर हमलों पर नजर डालें तो यह ट्रेंड साफ दिखाई देता है।
2 अक्टूबर 2024 (गांधी जयंती): प्रदेश का सबसे बड़ा साइबर हमला हुआ, जिसमें 90 से अधिक सरकारी वेबसाइटें प्रभावित होकर ठप हो गई थीं।
14 अप्रैल: आंबेडकर जयंती की सरकारी छुट्टी के दिन भी साइबर हमले की घटना सामने आई।
हालिया मामला: चीनी हैकर्स से जुड़े संदिग्ध मालवेयर का मामला शनिवार को सामने आया, जिस दिन कई सरकारी कार्यालयों और सचिवालय के कुछ विभागों में अवकाश रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, छुट्टी के दिनों में वेबसाइटों पर उपयोगकर्ताओं की संख्या कम होने से संदिग्ध गतिविधियों का तुरंत पता लगाना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है। ऐसे में साइबर अपराधी इस अवसर का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
इसे साइबर हमला नहीं माना जा सकता
उत्तराखंड की सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) के निदेशक आलोक पांडे ने कहा कि हालिया मामले में केवल एक मालवेयर मिला था। आगे पढ़िए..
उनके अनुसार, रोजाना लाखों मालवेयर इंटरनेट पर आते रहते हैं और इस घटना को सीधे साइबर हमला नहीं माना जा सकता। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं के पैटर्न का गहन विश्लेषण आवश्यक है, ताकि भविष्य में सरकारी डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
क्या होता है चीनी हैकर्स का तरीका?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में हमलावर मालवेयर के जरिए वेबसाइटों में सेंध लगाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य वेबसाइटों के क्रेडेंशियल (लॉगिन जानकारी) जैसे यूजरनेम, ईमेल आईडी और पासवर्ड तक पहुंच बनाना होता है। फिलहाल यह जांच का विषय है कि उत्तराखंड के हालिया मामले में किसी सरकारी वेबसाइट का डेटा या लॉगिन जानकारी प्रभावित हुई या नहीं। आईटीडीए का कहना है कि ऐसी किसी भी प्रकार की डेटा चोरी या सुरक्षा उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है।
साइबर सुरक्षा पर बढ़ी सतर्कता
उत्तराखंड में लगातार सामने आ रहे साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों के बीच विशेषज्ञों ने सरकारी वेबसाइटों की 24×7 निगरानी, नियमित सुरक्षा ऑडिट, समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट और एडवांस साइबर मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई है। इससे भविष्य में संभावित साइबर हमलों के जोखिम को कम किया जा सकेगा।