उत्तराखंड में 34.3% महिलाएं ओवरवेट या मोटापे की शिकार; NFHS-6 रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

NFHS-6 रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में 15 से 49 वर्ष की 34.3% महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी महिलाओं में मोटापे का प्रतिशत अधिक है।
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NFHS-6 Report: Uttarakhand Women Facing Rising Obesity Risk
Image: Uttarakhand Women Facing Rising Obesity Risk

देहरादून: उत्तराखंड में बदलती जीवनशैली और खानपान का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर महिलाओं में कुपोषण की समस्या भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में राज्य के सामने एक साथ मोटापा और कुपोषण की दोहरी पोषण चुनौती खड़ी हो गई है।

Uttarakhand Women Facing Rising Obesity Risk

NFHS-6 के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 34.3 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। पुरुषों में यह आंकड़ा 26.5 प्रतिशत है। वहीं 15.5 प्रतिशत महिलाओं और 17.8 प्रतिशत पुरुषों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 18.5 से कम है, जो सामान्य से कम वजन और कुपोषण की स्थिति की ओर संकेत करता है।

शहरों में मोटापे की समस्या ज्यादा

रिपोर्ट में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच भी बड़ा अंतर सामने आया है। शहरी क्षेत्रों में 42.8 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 30.6 प्रतिशत है। पुरुषों में भी शहरी क्षेत्रों में मोटापे का प्रतिशत ग्रामीण इलाकों से अधिक है। शहरों में 28.7 प्रतिशत पुरुष, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 25.3 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में हैं।

पांचवें सर्वे से बढ़ा महिलाओं का मोटापा

NFHS-5 (2019-21) की तुलना में महिलाओं में मोटापे की स्थिति और गंभीर हुई है। उस दौरान 15 से 49 वर्ष की 29.8 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थीं। अब यह आंकड़ा बढ़कर 34.3 प्रतिशत हो गया है। आगे पढ़िए..

हालांकि पुरुषों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। NFHS-5 में पुरुषों का यह आंकड़ा 27.1 प्रतिशत था, जो NFHS-6 में घटकर 26.5 प्रतिशत हो गया।

बदलती जीवनशैली और फास्ट फूड बड़ी वजह

डाइटीशियन आशा सिंह के अनुसार बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और असंतुलित खानपान मोटापे के प्रमुख कारण हैं। शहरी क्षेत्रों में शारीरिक गतिविधि कम होने, काम के लिए मशीनों पर अधिक निर्भरता और फास्ट फूड के बढ़ते सेवन का असर वजन पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ आबादी का एक हिस्सा मोटापे की समस्या से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर कुपोषण भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसे दोहरी पोषण चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए।

महिलाओं में तनाव भी बन रहा कारण

विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में तनाव और खराब दिनचर्या भी वजन बढ़ने की समस्या से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में संतुलित आहार के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
NFHS-6 के आंकड़े संकेत देते हैं कि उत्तराखंड में पोषण से जुड़ी चुनौतियां अब केवल कुपोषण तक सीमित नहीं हैं। राज्य को एक साथ कम वजन और बढ़ते मोटापे—दोनों समस्याओं से निपटने की जरूरत है।