उत्तराखंड: अनसुलझा रहेगा निठारी कांड? महिलाओं-बच्चों के मिले थे अवशेष, सुरेंद्र कोली की मौत छोड़ गई नए सवाल

सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद करीब 20 साल पुराना निठारी कांड फिर सुर्खियों में है, लेकिन 19 मौतों के लिए किसी की दोषसिद्धि अब कायम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से कोली और पंढेर को राहत मिलने के बाद भी निठारी की मौतों का रहस्य बना हुआ है
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Nithari Case: Nithari Case Mystery Returns After Surendra Koli Death
Image: Nithari Case Mystery Returns After Surendra Koli Death

हरिद्वार: साल 2006 में देश को झकझोर देने वाला निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में है। करीब दो दशक बाद इस मामले से जुड़े सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत ने उस पुराने सवाल को फिर सामने ला दिया है कि आखिर निठारी में गायब हुए बच्चों और महिलाओं की मौत के पीछे कौन था। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि अदालतों में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर दोनों को मामलों में दोषमुक्त किया जा चुका है।

Nithari Case Mystery Returns After Surendra Koli’s Death

29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई थी, जब सेक्टर-31 स्थित मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले और आसपास के इलाके से मानव अवशेष बरामद किए गए। जांच आगे बढ़ने पर कई लापता लोगों से जुड़े अवशेष सामने आए और मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया। मोनिंदर सिंह पंढेर के घर में घरेलू सहायक के तौर पर काम करने वाले सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर कई हत्याओं से जुड़े गंभीर आरोप लगे। बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले की जांच की और अलग-अलग मुकदमों में कोली को दोषी ठहराया गया तथा उसे कई बार मौत की सजा सुनाई गई।

फिर कैसे बदली निठारी केस की पूरी कहानी?

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोली को उसके खिलाफ लंबित 12 मामलों में और पंढेर को दो मामलों में बरी कर दिया। इसके बाद राज्य की अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में इन बरी किए जाने के फैसलों को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार अभियोजन का मामला पर्याप्त विश्वसनीय साक्ष्यों पर कायम नहीं था और जांच में गंभीर खामियां थीं। इस तरह निठारी मामले में अदालत से दोषसिद्धि का अंतिम आधार खत्म हो गया। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी बना रहा कि बरामद मानव अवशेषों और लापता लोगों की मौतों के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार व्यक्ति कौन था।

हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत से फिर उठे सवाल

18 सितंबर 2026 को सुरेंद्र कोली हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में अपनी चाय की दुकान पर मृत मिला। पुलिस के मुताबिक उसका शव फंदे से लटका हुआ था। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है और मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पुलिस ने फिलहाल मौत के कारण पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। कोली की मौत की खबर सामने आने के बाद निठारी कांड से जुड़े पुराने सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं। एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने भी कोली की मौत को लेकर संदेह जताया है, लेकिन यह उनका आरोप/आशंका है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

क्या निठारी का रहस्य कभी सुलझ पाएगा?

निठारी कांड की सबसे बड़ी पहेली यही है कि इतने वर्षों की पुलिस और CBI जांच, कई मुकदमों और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बावजूद उन मौतों के लिए किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि अंतिम रूप से कायम नहीं रह सकी। सुरेंद्र कोली की मौत ने इस मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है, लेकिन उनकी मौत को निठारी कांड से जोड़कर किसी नए निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। हरिद्वार पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही उनकी मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर आगे की तस्वीर साफ होगी।