15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI मर्चेंट भुगतान पर 0.4% MDR लागू होने को लेकर देहरादून के कुछ व्यापारियों में नाराजगी है। धामावाला और पलटन बाजार समेत कुछ इलाकों में कारोबारियों ने विरोध जताते हुए कैश भुगतान पर जोर देना शुरू किया है।
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
Example Ads Media
Image: Uttarakhand Traders Protest UPI MDR Charges Shift to Cash Payments
देहरादून: यूपीआई से भुगतान की आसान व्यवस्था अब कारोबारियों के बीच चिंता का कारण बनती नजर आ रही है। 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने जा रहा है। इसी के विरोध में देहरादून के कुछ व्यापारियों ने अभी से UPI के बजाय कैश में भुगतान लेना शुरू कर दिया है।
Uttarakhand Traders Protest UPI MDR Charges, Shift to Cash Payments
धामावाला, पलटन बाजार और आसपास के इलाकों में कुछ कारोबारी प्रस्तावित MDR को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। कई व्यापारियों का कहना है कि जिन दुकानों पर अक्सर ₹2,000 से अधिक की खरीदारी होती है, वहां नए शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। कुछ कारोबारियों ने UPI भुगतान से दूरी बनाते हुए ग्राहकों से नकद भुगतान लेने की बात कही है। बाजार में ऐसी दुकानों के बाहर कैश भुगतान से जुड़े नोटिस भी नजर आ रहे हैं।
पेट्रोल पंप पर QR कोड के साथ दिखा अनोखा विरोध
विरोध का एक अलग तरीका भी सामने आया है। एक पेट्रोल पंप पर QR कोड के स्थान पर हेल्पर की भर्ती से जुड़ा विज्ञापन चस्पा कर दिया गया। वहीं, एक दुकान के बाहर केवल कैश में भुगतान की तख्ती भी दिखाई दी। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि यह तख्ती पुरानी हो सकती है।
15 अक्टूबर से क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा। आगे पढ़िए..
₹2,000 तक के P2M लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं होगा। सरकार के अनुसार यह शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाना है। बैंकों और संबंधित संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए।
छोटे कारोबारियों के लिए भी राहत का प्रावधान
नई व्यवस्था में पात्र छोटे कारोबारी, जिनकी QR के जरिए UPI प्राप्तियां निर्धारित सीमा के भीतर हैं, MDR से बाहर रहेंगे। रिपोर्टों के अनुसार ₹1 लाख तक की मासिक UPI प्राप्तियों वाले छोटे मर्चेंट इस शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे।
व्यापारियों का कहना- बढ़ सकती है कैश पर निर्भरता
देहरादून के कुछ व्यापारियों का कहना है कि UPI ने पिछले वर्षों में डिजिटल भुगतान को काफी आसान बनाया है। ऐसे में अधिक मूल्य के लेनदेन पर MDR लागू होने से उन्हें अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है। कुछ कारोबारियों को आशंका है कि यदि शुल्क का खर्च व्यापारी स्वयं वहन करते हैं तो उनके मार्जिन पर असर पड़ेगा। वहीं, यदि किसी तरह इसकी भरपाई ग्राहकों से करने की कोशिश होती है तो खरीदारी की लागत बढ़ सकती है। सरकार की ओर से हालांकि ग्राहकों पर MDR का बोझ डालने की अनुमति नहीं है।
UPI से कैश की ओर लौटने की चर्चा
MDR लागू होने से पहले ही कुछ बाजारों में व्यापारियों द्वारा कैश भुगतान पर जोर दिए जाने की तस्वीर सामने आने लगी है। हालांकि, RBI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि नई व्यवस्था से बड़े पैमाने पर कैश की ओर वापसी होने की उम्मीद नहीं है। फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई व्यवस्था को लेकर व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के बीच चर्चा तेज है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका स्थानीय बाजारों में UPI और कैश भुगतान के इस्तेमाल पर कितना असर पड़ता है।