उस विधवा का दर्द समझने की कोशिश कीजिए, जो बीते 141 दिनों से अपने पति के हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए धरने पर बैठी है। कोटद्वार की कहानी पढ़िए
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आशीष किमोठी
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Image: Kotdwar shushil raghuvanshi murder case
पौड़ी गढ़वाल: कोटद्वार का एडवोकेट सुशील कुमार हत्याकांड। जब सुशील की दिन - दहाडे हत्या कर दी गई जिसे पूरा एक साल से ज्यादा समय हो गया है और आज तक भी हत्यारों की और हत्या करवाने वालों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है | इस पूरे प्रकरण में कोटद्वार के कोतवाल की भूमिका पर सवाल खड़ा करता है जो हत्या करवाने वालों को बचाने में पूरी मदद कर रहा है | पुलिस ने जो बयान डायरी में लिखे थे वो डायरी ही गायब कर दी गई और मोबाइल रिकॉर्डिग भी गायब कर दी गई है और यही SIT भी बोल रही जबकि इस फोटो से साफ़ जाहिर हो रहा है कि कोटद्वार पुलिस के SI ने बयान दर्ज किए हैं | इससे ही पता चल जाता है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए कितना तत्पर है। इसलिए हत्या करवाने वाले और हत्या करने वाले आज भी खुलेआम घूम रहे हैं |
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इस हत्याकांड को हुए पूरे सवा साल हो गए हैं और ना तो कोटद्वार पुलिस या SIT ने जिसे बने भी 3 महीने से ज्यादा हो गया है हत्यारे और हत्या करवाने वालों को तो छोडो , ये आज तक भी हत्या में इस्तेमाल किए हथियार और गाड़ी तक को भी बरामद नहीं कर पाई | इससे कोटद्वार पुलिस और SIT की कार्यप्रणाली का साफ़ पता चलता है कि उत्तराखंड की मित्र पुलिस असल में अपराधियों की मित्र है और जनता की दुश्मन ! पुलिस की इस तरह कि कार्यप्रणाली से समाज में भय का महौल बना हुआ है | कोटद्वार में स्थानीय लोगों और बार एसोसिएशन के धरना प्रदर्शन को 141 वां दिन हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये तब तक जारी रहेगा जब तक हत्यारों की और हत्या करवाने वालों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती |
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धरना करने वालों में रेखा रघुवंशी, आशीष किमोठी, एडवोकेट ध्यान सिंह नेगी, मुजीब नैथानी, एडवोकेट विश्जीत बडथ्वाल, एडवोकेट हुकुम सिंह, शगुफ़्ता सिंह, मनोज सिंह, राजदर्शन, हरीश चंद, प्रदीप कुमार शर्मा शामिल रहे | उत्तराखंड पुलिस के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है कि पुलिस इस हत्याकांड का खुलासा नहीं कर पा रही है | ऐसा क्या है जो पुलिस आँखें मूद कर बैठी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस के अधिकारियों को सबकुछ पता है फ़िर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं | इतना समय बीत जाने के बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है | 13 सितंबर 2017 को कोटद्वार के बीएल रोड में दिन दहाड़े एडवोकेट सुशील कुमार रघुवंशी की हत्या कर दी गई थी। बाइक सवार बदमाशों ने एडवोकेट की पीठ पर गोली मारी थी और भाग गए थे। अब तक बदमाश पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। एडवोकेट सुशील उस वक्त कोर्ट के लिए निकल रहे थे। अब सवाल ये है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी कोटद्वार पुलिस क्या हाथ पर हाथ धरे बैठी है?