Advertisement
भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
Example Ads Media
पौड़ी गढ़वाल: गढ़वाली हमारी बोली होने के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक पहचान है। खाली होते गांवों के चलते पहाड़ की बोली-भाषा पर भी खतरा मंडरा रहा है। बहरहाल देर से ही सही शिक्षा विभाग ने गढ़वाली भाषा को बचाने की मुहिम शुरू कर दी है। अब उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में बच्चों को गढ़वाली सिखाई जाएगी। इससे नौनिहालों को अपनी बोली-भाषा को जानने-समझने का मौका मिलेगा। शिक्षा विभाग इस मुहिम की शुरुआत पौड़ी से करने जा रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर गढ़वाली भाषा को स्कूल के पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा। प्रयास के पहले चरण में पौड़ी में कक्षा 1 से लेकर 5 तक के बच्चों को गढ़वाली भाषा पढ़ाई जाएगी। दूसरे चरण में कक्षा 5 से लेकर 8वीं तक के बच्चों को गढ़वाली सिखाई जाएगी। विभाग की तरफ से गढ़वाली भाषा का पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए 9 टीचर्स को चुना गया है। पहाड़ के ये टीचर्स जल्द ही गढ़वाली भाषा पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार कर इसे विभाग को सौंपेंगे।