उत्तराखंड के एक सरकारी स्कूल में 9वीं के बच्चे देहरादून की स्पेलिंग तक नहीं बता सके, एसडीएम ने अब टीचरों को 1 महीने का अल्टीमेटम दिया है..पढ़ें पूरी खबर
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कोमल नेगी
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Image: UTTARAKHAND TANAKPUR SCHOOL DEHRADUN SPELLING
चम्पावत: सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या घटती जा रही है। कई प्राथमिक स्कूल बंद हो गए हैं, तो वहीं सैकड़ों बंद होने की कगार पर हैं। इन स्कूलों में कैसी पढ़ाई होती है, इसकी एक तस्वीर टनकपुर में देखने को मिली। जहां बच्चे अंग्रेजी में देहरादून की स्पेलिंग तक नहीं बता पाए। ये हाल उच्चतर माध्यमिक स्कूलों का है, जहां 9वीं में पढ़ने वाले बच्चों का गणित के साथ-साथ अंग्रेजी में भी डिब्बा गोल है। घटना गुरुवार की है। एसडीएम दयानंद सरस्वती क्षेत्र के दौरे पर निकले थे। इसी बीच वो उचौलीगोठ के स्कूलों का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। सबसे पहले वो प्राइमरी स्कूल में गए। स्कूल में एक टीचर अनुपस्थित था, पता चला मास्साब छुट्टी पर हैं। स्कूल में राष्ट्रीय बाल हेल्थ कार्यक्रम चल रहा था। जिसमें बच्चों की जांच कर उन्हें जागरूक किया जा रहा था। यहां की स्थिति फिर भी बेहतर थी। बाद में एसडीएम राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गए। जहां कक्षा 9 के बच्चे अंग्रेजी पढ़ रहे थे। आगे पढ़िए
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अंग्रेजी की कक्षा के दौरान एसडीएम ने बच्चों से कई सवाल पूछे पर वो जवाब नहीं दे सके। बच्चों के साथ-साथ उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की हालत भी देखने लायक थी। एसडीएम के सामने पोल जो खुल गई थी। बाद में एसडीएम ने बच्चों से प्रदेश की राजधानी देहरादून की स्पेलिंग अंग्रेजी में बताने को कहा, पर बच्चे वो भी नहीं बता सके। इस पर एसडीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने शिक्षकों को जमकर लताड़ लगाई, और एक महीने के भीतर स्थिति सुधारने को कहा। एसडीएम बोले कि अगर एक महीने बाद भी हालात यही रहे तो शिक्षकों की सैलरी काट ली जाएगी। एसडीएम की घुड़की का शिक्षकों पर कितना असर हुआ है, इसका पता तो एक महीने बाद ही चलेगा। पहाड़ के ज्यादातर सरकारी स्कूलों का यही हाल है। ना तो शिक्षकों को पढ़ाने में रुचि है, और जो वो पढ़ा रहे हैं वो बच्चे कितना सीख पा रहे हैं ये आपने देख ही लिया। सरकारी स्कूलों की मॉनिटरिंग के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, कोई पूछने वाला नहीं है, जिसका खामियाजा छात्र भुगत रहे हैं। यही वजह है कि लोग अब अपने बच्चो को सरकारी स्कूलों में पढ़ने नहीं भेजते।