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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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देहरादून: आधुनिकता की दौड़, सुख-सुविधाओं की दौड़ और रिटायरमेंट के बाद शहर में अच्छी जिंदगी जीने की दौड़...इस दौड़ में इंसान जिंदगी से कब पिछड़ जाता है पता ही नहीं चलता। हां...कुछ लोग होते हैं जिन्हें जिंदादिल कहा जाता है क्योंकि वो अपनी जड़ों को कभी भी नहीं भूलते। ऐसे ही जिंदादिल हैं उत्तराखंड की धरती पर जन्मे जनरल बिपिन रावत। आपको जानकारी तो होगी ही कि जनरल बिपिन रावत हाल ही में केदारनाथ और बदरीनाथ दर्शनों के लिए उत्तराखंड आए थे। अब जनरल ने ऐलान किया है कि वो रिटायरमेंट के बाद अपने गांव में ही रहेंगे। ये बात इसलिए खास है क्योंकि देश की सेना की चीफ को रिटायरमेंट के बाद भी खास सुविधाएं दी जाती हैं लेकिन जनरल रावत इन सुविधाओं को नकारने के लिए तैयार हैं। बदरी केदार दर्शनों के बाद बिपिन रावत अपने मामा के घर थाती धनारी पहुंचे हैं। वहां उनका फूल मालाओं से स्वागत हुआ।