बीरोंखाल की बहादुर राखी के गांव में गुलदार बना चुनावी मुद्दा, आतंक से चाहिए मुक्ति

देवकुंडई के ग्रामीणों ने कहा कि वो पंचायत चुनाव में गुलदार के आतंक से मुक्ति के लिए वोट देना चाहते हैं...
Advertisement हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम

पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।

Example Ads Media
panchayat election: In the village of rakhi rawat leopard is the issue for panchayat election
Image: In the village of rakhi rawat leopard is the issue for panchayat election

पौड़ी गढ़वाल: पौड़ी का देवकुंडई गांव इन दिनों सुर्खियों में है। सुर्खियों की वजह है गांव की रहने वाली 11 साल की राखी, जिसने हाल ही में गुलदार से अपने 4 साल के भाई की जान बचाई थी। गुलदार के हमले में राखी के भाई को मामूली चोट लगी, लेकिन गुलदार के कई वार सहने वाली राखी के जख्म अब भी भरे नहीं है। 11 साल की इस बच्ची की बहादुरी ने बीरोंखाल के इस गांव को सुर्खियों में ला दिया। और तो और राखी के गांव में पंचायत चुनाव का मुख्य मुद्दा भी गुलदार से मुक्ति ही है, क्योंकि इस गांव के लोग अब भी डरे हुए हैं। गुलदार दहशत का सबब नहा हुआ है। पंचायत चुनाव के आखिरी चरण में पौड़ी जिले के पोखड़ा, नैनीडांडा, थलीसैंण, रिखणीखाल और बीरोंखाल ब्लॉक में चुनाव होने हैं। राखी का गांव देवकुंडई बीरोंखाल ब्लॉक में पड़ता है, जहां आस-पास के 12 से ज्यादा गांवों में गुलदार आतंक का सबब बना हुआ है। यहां के लोग पंचायत चुनाव में उस प्रत्याशी को वोट देना चाहते हैं, जो उन्हें गुलदार के आतंक से मुक्ति दिलाए। इलाके में गुलदार का खतरा लगातार बना हुआ है, लोग दहशत में हैं। राखी के पिता दलवीर सिंह रावत कहते हैं कि गुलदार दिन में ही गांव में आ जाता है, उन्हें अब बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगने लगा है। वहीं वन विभाग का कहना है कि इलाके में गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि लोगों का डर कम हो सके।
यह भी पढ़ें - उत्तराखंडियों के लिए केजरीवाल सरकार ने किया बड़ा काम, दिल्ली में ऐसा पहली बार हुआ