सलाम ऋषिकेश पुलिस..लॉकडाउन में अपने खर्च से भरा गरीबों का पेट, दिव्यांग को गांव तक पहुंचाया

ऋषिकेश में एक बार फिर पुलिस का मानवीय चेहरा देखने को मिला। यहां चारधाम यात्रा बस टर्मिनल कपाउंड में तैनात पुलिसकर्मी ड्यूटी करने के साथ-साथ गरीबों का पेट भी भर रहे हैं...आगे पढ़िए पूरी खबर
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Coronavirus Uttarakhand: Coronavirus Uttarakhand:Rishikesh police providing food to the needy
Image: Coronavirus Uttarakhand:Rishikesh police providing food to the needy

ऋषिकेश: उत्तराखंड में लॉकडाउन के बीच ‘खाकी’ जरूरतमंदों की सच्ची दोस्त साबित हो रही है। जगह-जगह पुलिस का मानवीय चेहरा देखने को मिल रहा है। ऐसी ही एक तस्वीर ऋषिकेश से आई है। जहां कोतवाली के चारधाम यात्रा बस टर्मिनल कपाउंड में तैनात पुलिसकर्मी ड्यूटी करने के साथ-साथ गरीबों का पेट भी भर रहे हैं। पुलिस चौकी में तैनात पुलिसकर्मी बिना किसी सरकारी मदद के अपने निजी खर्च से लोगों को भोजन मुहैय्या करा रहे हैं। चारधाम यात्रा बस टर्मिनल ऋषिकेश का वो क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा आवाजाही रहती है। लॉकडाउन की वजह से यहां बसों के स्टाफ, चौकीदार और कुछ बेसहारा लोग ही रह गए हैं। भूले-भटके लोग भी यहां पहुंच जाते हैं। लॉकडाउन की वजह से होटल-ढाबे बंद हैं, जिस वजह से बेसहारा लोगों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है। ऐसे लोगों के लिए चौकी में तैनात पुलिसकर्मी खुद खाना तैयार कर रहे हैं। पुलिस चौकी में हर दिन 30 से 40 लोगों के लिए खाना बनता है। पुलिसकर्मी ये खाना जरूरतमंदों तक खुद पहुंचाते हैं। पुलिस के सेवाभाव को देखते हुए आस-पास के सब्जी विक्रेता भी पुलिस की मदद के लिए आगे आने लगे हैं।

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इसके अलावा ऋषिकेश पुलिस ने पौड़ी के रहने वाले एक दिव्यांग और पीलीभीत निवासी लकवाग्रस्त रोगी को उनके घर भेजने की व्यवस्था भी की। जानकारी के मुताबिक धुमाकोट के रहने वाले 36 वर्षीय योगंबर सिंह का एम्स में इलाज चल रहा है। फरवरी में कैंसर की वजह से उनका एक पैर काटना पड़ा। तब से वो हॉस्पिटल में ही थे। साथ में पत्नी और 3 साल की बेटी भी थी। लॉकडाउन की वजह से ये लोग गांव नहीं जा पा रहे थे। रविवार को पुलिस ने तीनों को एंबुलेंस के जरिए घर को रवाना किया। प्रशासन भी जरूरतमंदों की हरसंभव मदद कर रहा है। रानीपोखरी में जिला प्रशासन ने खनन कार्य में लगे मजदूरों को राशन उपलब्ध कराया। जाखन नदी के किनारे रहने वाले 269 मजदूरों को राशन दिया गया। इसके अलावा नागाघेर और आसपास के इलाकों में भी खाद्य सामग्री पहुंचाई गई। मुसीबत के वक्त में जो लोग जरूरतमंदों के लिए फरिश्ते बने हुए हैं, उनकी कहानियां आप तक पहुंचाना बहुत जरूरी है। आपके पास भी ऐसी कोई कहानी हो, तस्वीर हो तो हमारे साथ जरूर शेयर करें।