दिल्ली का निजामुद्दीन इलाका। यहां इसी महीने तब्लीगी जमात हुई थी। खतरे वाली बात ये है कि जमात में उत्तराखंड के भी कई लोग शामिल थे। मरकज से वापस लौटे ये लोग अगर क्वॉरेंटीन ना हुए या ट्रेस नहीं किए जा सके, तो समझ लो देवभूमि को मरघट बनने में देर नहीं लगे
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कोमल नेगी
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Image: Coronavirus Uttarakhand:Uttarakhand people coming back from delhi tablighi jamaat
देहरादून: उत्तराखंड में कोरोना के 7 केस सामने आ चुके हैं। मुश्किल का वक्त है, हर कोई बस यही प्रार्थना कर रहा है कि संकट टल जाए, पर अब हम जो खबर आपको बताने जा रहे हैं, वो सुन आपकी टेंशन बढ़ जाएगी। दिल्ली का निजामुद्दीन इलाका। यहां इसी महीने तब्लीगी जमात हुई थी। इसे आप यूं समझ सकते हैं कि इस्लाम का प्रचार करने वाले लोग जमा हुए थे। 30 मार्च को जमात में शामिल हुए 1000 लोगों को जमात के मरकज यानि सेंटर से निकाला गया। इस मरकज में 3000 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे और खतरे वाली बात ये है कि इन लोगों में उत्तराखंड के भी कई लोग शामिल थे। कई सूत्रों के अनुसार जमात में शामिल लोगों की संख्या 8 हजार से ज्यादा थी। मरकज से वापस लौटे ये लोग अगर क्वॉरेंटीन ना हुए या ट्रेस ना हो पाये तो समझ लो देवभूमि को मरघट बनने में देर नहीं लगेगी। कुल मिलाकर उत्तराखंड भयानक खतरे में है। शुरुआती जानकारी के अनुसार तबलीगी जमात में हरिद्वार के ज्वालापुर के एक गांव से 11 लोगों ने हिस्सा लिया था। देहरादून से भी बड़ी तादाद में लोग गए थे। अकेले देहरादून में 102 लोगों को चिह्नित किया गया है, जो कि जमात में शामिल थे। 14 लोगों को हरिद्वार पुलिस ने बॉर्डर में भी क्वॉरेंटीन किया है, शक है कि ये भी मरकज से लौटे हैं। आगे भी पढ़िए
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उत्तराखंड से जमात में शामिल होने वालों की संख्या बहुत ज्यादा बताई जा रही है। ये लोग देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी के रहने वाले हैं। सवाल कई हैं, जिनके जवाब अब तक नहीं मिल पाए हैं। कोरोना के कहर को लेकर लगातार सतर्कता बरती जा रही थी। फिर भी दिल्ली में तीन हजार से ज्यादा लोग इकट्ठे हो गए। जिनमें इंजीनियर, प्रोफेसर और डॉक्टर जैसे पढ़े-लिखे लोग तक शामिल थे। जिन लोगों पर समाज की भलाई का जिम्मा था, वही इतनी घटिया हरकत कर बैठे। लाखों लोगों की जान खतरे में डाल दी। देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस फैलने के तार तब्लीगी जमात से ही जुड़ रहे हैं। तेलंगाना में कोरोना से छह लोग मर गए, ये सभी तब्लीगी जमात में शामिल हुए थे। यहां करोना के 71 मामलों में से 40 मामले जमात से जुड़े हैं। कश्मीर में भी एक शख्स की मौत होने की खबर है, वो भी जमात में शामिल हुआ था। ये भी कहा जा रहा है कि मरकज से निकलने वाले कई लोग मजदूरों के दल में शामिल होकर अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंच गए हैं। कोरोना संक्रमित लोग प्रदेश में कई जगह छुपे हो सकते हैं। ऐसे में आप खुद समझ सकते हैं कि उत्तराखंड कितने बड़े खतरे से जूझ रहा है। हमारा मकसद आपको डराना नहीं, बल्कि जागरूक करना है। अगर आपके पास बाहर से लौटे लोगों के बारे में जानकारी हो तो तुरंत प्रशासन को बताएं। आपकी सतकर्ता आपकी और दूसरे लोगों की जान बचा सकती है।