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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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पिथौरागढ़: उत्तराखंड में परिस्थितियां बद से बदतर हों रही हैं। हर दिन कोरोना के केस अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने में तुले हुए हैं। सरकार और प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल रखे हैं। ऐसे में जरूरत है कि अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी अब खुद के ही हाथों में ली जाए। यह जरूरी भी है। ऐसे में उत्तराखंड के कई ऐसे गांव हैं जो अपनी सुरक्षा खुद ही कर रहे हैं। कई गांवों ने खुद को पूरी तरह से सील कर दिया है और बाहर से लोगों की आवाजाही भी बंद हो रखी है। गांववालों के द्वारा भी इस निर्णय को सपोर्ट किया जा रहा है। ऐसा ही कुछ निर्णय पिथौरागढ़ के बेरीनाग में जिला पंचायत ने लिया। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में जिला पंचायत के सदस्य दिवाकर रावल ने चौखुना पिपली के 22 गांवों के ग्राम प्रधानों के साथ बैठक की। सभी ग्राम प्रधानों का यह मानना था कि कोरोना को गांव में आने से रोकने के लिए कठोरता बरतनी ही पड़गी। सभी विचार-विमर्श करके इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि सभी गांव में ग्राम प्रधान की अनुमति के बाद ही प्रवेश मिल सकता है।