टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन जरूरत बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में सुनसान होते गांव की पीड़ा शायद ही कोई समझे। शहरों की घुटन भरी जिंदगी से कई गुना अच्छी गांव की सुकूनभरी जिंदगी है। ऐसे में जरूरत है कि युवा गांव की ओर वापस आएं और स्वरोजगार अपनाएं। लॉकडाउन के कारण बेरोजगार हुए युवा भी गांव की ओर लौट चले हैं, ऐसे में उनको भी स्वरोजगार की तरफ कदम बढ़ाने चाहिए।यह युवाओं की गलतफहमी है कि पहाड़ों पर स्वरोजगार अपनाने से आमदनी नहीं हो पाएगी। कितने ऐसे अनोखे स्टार्टअप हैं जो कम खर्च में काफी मुनाफा देते हैं। मुर्गी पालन उनमें से एक है। टिहरी के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह के जरिए कुछ लोगों ने न केवल इस बात को साबित किया है बल्कि स्वरोजगार की दिशा में एक कामयाब कदम भी उठाया है। विकासखंड थौलधार के वैष्णव स्वयं सहायता समूह कोटि डोभालों ने एनआरएलएम के तहत महज 4 महीने पहले कड़कनाथ मुर्गों की पोल्ट्री फार्म की शुरुआत की थी। मुर्गी पालन के इस प्रोजेक्ट में में 4 महीने में तकरीबन 1 लाख 20 हजार मुर्गियों की खरीद सहित खर्च हो गए हैं जिसमें 4 लाख का लाभ हुआ है।