गुलदार ने जिले के एक गांव में पशुपालक की तीन बकरियां मार दीं। गांव में गुलदार की बढ़ती धमक से ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से पीड़ित को मुआवजा देने की मांग की।
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Komal Negi
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Image: Awe of Guldar in Bageshwar
बागेश्वर: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र इस वक्त कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। कोरोना काल में लोगों की परेशानियां बढ़ी हैं। मौसम कहर बरपा रहा है, उस पर जंगली जानवर लोगों और मवेशियों के लिए काल साबित हो रहे हैं। गुलदार जंगलों से निकल कर आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हैं। लोगों पर हमला कर रहे हैं, मवेशियों की जान ले रहे हैं। ताजा मामला बागेश्वर के अनर्सा गांव का है, जहां शुक्रवार रात गुलदार ने एक गांव में पशुपालक की तीन बकरियां मार दीं। गुलदार की बढ़ती धमक से गांव वाले दहशत में हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से पीड़ित पशुपालक को मुआवजा देने की मांग की। साथ ही क्षेत्र में गश्त बढ़ाने को भी कहा। बारिश और अतिवृष्टि के दौरान गुलदार अब गांवों की तरफ रुख करने लगे हैं। जंगल में भोजन की कमी होने की वजह से गुलदार इंसानी बस्तियों में दाखिल हो रहे हैं, जिससे लोग डरे हुए हैं। अनर्सा गांव में पीड़ित पशुपालक भरत सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। शुक्रवार रात वो घर में सो रहे थे। तभी गुलदार गोशाला का दरवाजा तोड़कर भीतर दाखिल हो गया। आगे पढ़िए
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गुलदार ने गोशाला में बंधी बकरियों पर हमला कर दिया। जिसकी भनक भरत सिंह को लग गई। वो तुरंत मौके पर पहुंचे और शोर मचाकर गुलदार को भगाने की कोशिश में जुट गए। शोर सुनकर गुलदार वहां से भाग गया, लेकिन तब तक भरत सिंह का भारी नुकसान हो चुका था। गुलदार ने गोशाला में बंधी तीन बकरियों को मार दिया था। गुलदार के हमले में मारी गई बकरियां ही पशुपालक भरत सिंह की आजीविका का जरिया थीं। वो मवेशी पालकर परिवार की गुजर-बसर करते हैं। भरत सिंह ने बताया कि क्षेत्र में गुलदार आतंक का सबब बना हुआ है। वह लगातार मवेशियों को मार रहा है। गुलदार के डर से लोग शाम होने से पहले ही घरों में कैद हो जाते हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से पीड़ित पशुपालक को मुआवजा देने की मांग की। साथ ही क्षेत्र में गश्त बढ़ाने को कहा। वहीं प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही ने रेंजर को घटनास्थल पर जाने के निर्देश दिए हैं।