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Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of
Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.
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हरिद्वार: प्रकृति है तो मनुष्य है। प्रकृति के बिना मनुष्य के अस्तित्व की कल्पना करना भी नामुमकिन है। धरती की संरचना में प्रकृति का एक बहुत ही बड़ा अहम योगदान है और प्रकृति वह चीज है जिसने हम सभी को जीवित रखा हुआ है। कहा जाता है कि हम प्रकृति के अधीन हैं।मगर मनुष्यों ने सालों से प्रकृति को अपना गुलाम बना कर रखा हुआ है। मनुष्य अपनी सुविधाअनुसार प्रकृति का हनन कर रहा है, उसका शोषण कर रहा है। पर्यावरण का संरक्षण इस समय एक ऐसा विषय है जिसके बारे में हम सभी को गंभीरता से सोचना चाहिए। और ऐसा हो भी रहा है। प्रकृति के लगातार हो रहे हनन और मानवीय गतिविधियों से हमारे पर्यावरण को जो चोट पहुंच रही है उसके लिए युवा वर्ग अपनी आवाज बुलंद कर रहा है और एक स्वर में प्रकृति के संरक्षण की बात कर रहा है। पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर विषय को समझते हुए छोटे बच्चे लगातार आगे बढ़ रहे हैं। प्रकृति को बचाने हेतु वे लगातार काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में अपना नाम जोड़ा है उत्तराखंड के हरिद्वार की महज 13 वर्ष की रिद्धिमा पांडे ने। मात्र 13 वर्ष की छोटी सी उम्र में रिद्धिमा पांडे दुनिया की 100 प्रेरक और प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल हो गई हैं। बीबीसी हर साल दुनिया की 100 ऐसी महिलाओं की लिस्ट निकालती है और उनको सम्मानित करती है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में शानदार काम किया है। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक बीबीसी द्वारा जारी की गई लिस्ट में हरिद्वार की नन्ही बेटी ने विश्व की टॉप 100 प्रेरक और प्रभावशाली महिलाओं के बीच जगह बना ली है। पूरे देश में कुल 3 ही भारतीय महिलाओं को इस लिस्ट में शुमार किया गया है और यह देवभूमि के लिए गर्व की बात है कि ऋद्धिमा पांडे उन तीनों महिलाओं में से एक है और सबसे कम उम्र की है।