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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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देहरादून: वो ऐसा वीभत्स गैंगरेप था, जिसके बारे में कल्पना करने से ही रूह कांप उठती है। कैसे? क्यों? उस बेटी के साथ ऐसी दरिंदगी की गई? इतना समझ लीजिए कि वो कोई सामान्य घटना नहीं थी। एक मिडिल क्लास घर की लड़की, जो ऑफिस जाती थी और अपनी जिंदगी को संवारने के सपने देखती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, पिता सेक्योरिटी गार्ड थे। इसलिए किरन सोचती थी कि जल्द से जल्द एक घर खरीदना है और अपने पूरे परिवार के साथ हंसी खुशी रहना है। वो घर आते ही जोर से कहती थी..मां मैं आ गई। उस आवाज को याद करते हुए आज भी किरन की मां की आंखें भर आती हैं। 9 फरवरी 2012 का वो काला दिन आज भी जख्मों को कुरेदता है। किरण अपने ऑफिस से घर आ रही थी कि तभी गुड़गांव में एक लाल इंडिका में उसका अपहरण कर लिया गया। आगे पढ़िए