चंपावत फर्जी गैंगरेप मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सभी आरोपियों को पिथौरागढ़ जेल भेजा गया है। पुलिस मामले की साजिश के एंगल से जांच कर रही है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Court Rejects Bail in Champawat Fake Gangrape Case
चम्पावत: उत्तराखंड के Champawat जिले में चर्चित फर्जी गैंगरेप प्रकरण में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष सत्र न्यायालय ने मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के आदेश के बाद सभी आरोपियों को पिथौरागढ़ जिला जेल भेज दिया गया है। वहीं, पुलिस अब भी मामले के पांचवें आरोपी की तलाश में जुटी हुई है।
Court Rejects Bail in Champawat Fake Gangrape Case
जिला शासकीय अधिवक्ता Vidhyadhar Joshi ने जानकारी देते हुए बताया कि विशेष सत्र न्यायाधीश एवं जिला जज अनुज कुमार संगल की अदालत ने शुक्रवार को चारों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। जिन आरोपियों की जमानत खारिज हुई, उनमें कमल सिंह रावत और उसकी महिला मित्र, कांग्रेस प्रदेश सचिव आनंद महरा और बबलू राम शामिल हैं। कोर्ट के फैसले के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में पिथौरागढ़ जिला जेल भेज दिया गया।
कब और कैसे हुई गिरफ्तारी?
पुलिस के मुताबिक दो आरोपियों को 8 मई को गिरफ्तार किया गया था, जबकि बाकी दो आरोपियों को 13 मई को पकड़ा गया। मामले में पांचवां आरोपी राहुल सिंह रावत अभी भी फरार बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। आगे पढ़िए..
क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला 5 मई की रात सामने आया था, जब एक 16 वर्षीय किशोरी ने तीन लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 6 मई को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती दौर में मामला बेहद गंभीर माना गया और पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की थी। पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में कथित गैंगरेप के आरोप असत्य पाए गए। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले को एक सुनियोजित साजिश माना। पुलिस ने आरोप लगाया कि गैंगरेप की कहानी रची गई थी और इसी आधार पर पांच लोगों के खिलाफ साजिश रचने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
राजनीति में भी मचा था बवाल
चंपावत का यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन गया था। मामले को लेकर प्रदेशभर में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। क्योंकि आरोपियों में एक राजनीतिक दल से जुड़े नेता का नाम भी सामने आया था, इसलिए इस प्रकरण ने राज्य की राजनीति में भी हलचल मचा दी थी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी भी जारी है। फरार आरोपी की तलाश की जा रही है और पूरे प्रकरण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।