टिहरी जिले की नई एसएसपी तृप्ति भट्ट ने आईपीएस बनने के लिए कई बड़े सरकारी जॉब ऑफर्स यहां तक कि इसरो से आया हुआ वैज्ञानिक बनने का ऑफर भी ठुकरा दिया था।
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Komal Negi
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Image: Know about new SSP of Tehri Garhwal tripti bhatt
टिहरी गढ़वाल: कुछ दिनों पहले उत्तराखंड के मुख्य पुलिस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं। आईपीएस तृप्ति भट्ट को भी टिहरी गढ़वाल की कमान सौंपी गई थी जिसके बाद से ही आईपीएस एसएसपी तृप्ति भट्ट एक्शन मोड में नजर आ रही हैं। आईपीएस तृप्ति इससे पहले चमोली जिले की एसएसपी थीं और उनको एसडीआरएफ में मुख्य सेनानायक की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। अब नई टिहरी जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने की कमान उनके हाथों में सौंप दी गई है। टिहरी जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही आईपीएस तृप्ति भट्ट पुलिसकर्मियों की फिटनेस के ऊपर भी खासा ध्यान दे रही हैं। उनकी आईपीएस बनने की पूरी जर्नी बहुत ही प्रेरणादायक है। उनके जीवन का एक अनछुआ पहलू भी है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आज हम आपको टिहरी जिले की एसएसपी आईपीएस तृप्ति भट्ट के जीवन के उसी अनोखे पहलू से रूबरू कराएंगे
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टिहरी गढ़वाल के नए एसएसपी आईपीएस तृप्ति भट्ट मूल रूप से अल्मोड़ा जिले की रहने वाली हैं और वे 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि तृप्ति भट्ट का एकमात्र लक्ष्य आइपीएस अधिकारी बनने का था और उन्होंने करियर की शुरुआत से ही सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी थी। उनका नाता शिक्षक परिवार से रहा है। उन्होंने पंतनगर यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री प्राप्त की। अपने बीटेक के बाद आईपीएस तृप्ति भट्ट को कई बड़े सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों से जॉब ऑफर मिले थे। यहां तक कि उनको इसरो से साइंटिस्ट बनने का अवसर भी मिला था। मगर उनका लक्ष्य केवल और केवल आईपीएस अधिकारी बनना था इसलिए उन्होंने तमाम सरकारी एवं बड़े-बड़े जॉब ऑफिस को ठुकरा दिए। यहां तक कि उन्होंने इसरो से आए साइंटिस्ट बनने के ऑफर को भी ठुकरा कर आईपीएस बनने का गोल निर्धारित कर सिविल सर्विस के एग्जाम पर फोकस किया।
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आईपीएस तृप्ति भट्ट लगातार सिविल सर्विस की तैयारी करती रहीं और जो उन्होंने चाहा वो करके भी दिखाया। तमाम संघर्षों के बाद आखिरकार उन्होंने 2013 में सिविल सर्विस की परीक्षा क्रैक की और कड़ी मेहनत एवं लगन के बाद उनका 2013 में इंडियन पुलिस सर्विस में सिलेक्शन हो गया। ट्रेनिंग के बाद सबसे पहली पोस्टिंग उनकी देहरादून के विकास नगर थाने में हुई जिसके बाद उन्होंने खनन माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए उनको जेल के अंदर भेजा। वे पिछले लंबे समय से उत्तराखंड के चमोली जिले के एसएसपी भी रहीं और एसडीआरएफ में मुख्य सेनानायक के रूप में भी कार्यरत थीं। अब उनके कंधों पर टिहरी जिले के कानून व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। आईपीएस तृप्ति भट्ट को कोरोना काल के दौरान उत्तराखंड एसडीआरएफ द्वारा किए गए उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए साल 2020 का स्कोच अवॉर्ड भी मिल चुका है। कोरोना महामारी के दौरान उत्तराखंड पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की मदद कर मानवता की ठोस मिसाल समाज का भी पेश की थी और आईपीएस तृप्ति भट्ट ने भी इस में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था और अपने इसी प्रशंसनीय काम के चलते उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर स्कोच अवॉर्ड हासिल किया और समूचे उत्तराखंड को गौरवान्वित होने का सुनहरा अवसर भी प्रदान किया।