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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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देहरादून: माता-पिता और संतान का रिश्ता लाड़-दुलार का होता है। बच्चे माता-पिता की पूरी दुनिया होते हैं। अभिभावकों का बच्चों पर प्यार-दुलार लुटाना आम बात है, लेकिन कई बार बच्चों की हर जिद मानना और उनकी गलतियों को नजरअंदाज करना इस रिश्ते को बर्बाद करने के लिए काफी होता है। अब उत्तराखंड में ही देख लें, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि यहां माता-पिता की छोटी सी गलती के चक्कर में पिछले तीन साल में 158 नाबालिगों की मौत हो गई। यही नहीं करीब 325 नाबालिग बच्चे गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। उत्तराखंड यातायात निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन साल में 158 नाबालिगों ने एक्सीडेंट के दौरान सड़कों पर दम तोड़ दिया। ये वो नादान बच्चे थे, जिन्होंने रफ्तार के जुनून में अपनी जान गंवा दी। जिस उम्र में हाथों में किताबें थमाई जानी थीं, उस उम्र में परिजनों ने हाथों में एक्सीलेटर थमा दिया तो अंजाम बुरा होना ही था। तेजी से ड्राइविंग के चलते इन मासूमों ने सड़कों पर दम तोड़ दिया। एक रिसर्च के मुताबिक पिछले तीन साल में 158 मासूमों का एक्सीडेंट में घायल होकर यूं सड़कों पर दम तोड़ देना बेहद गंभीर विषय है। आगे पढ़िए