Advertisement
No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
Example Ads Media
हरिद्वार: दुनिया अक्सर सफल व्यक्ति की सफलता को देखती है। मगर शायद वह यह भूल जाती है कि उस मुकाम तक पहुंचने के लिए न जाने कितना खून पसीना बहाना पड़ा होगा, कितनी बार ठोकर खाने पड़ी होंगी, कितनी बार अवहेलना का सामना करना होगा, हार का मुंह देखना पड़ा होगा। हॉकी स्टार और हैट्रिक गर्ल वंदना कटारिया भी इन दिनों बेहद चर्चा में आ रखी हैं।टोक्यो ओलंपिक में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हैट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया के बुधवार को हरिद्वार पहुंचने पर जगह-जगह भव्य स्वागत हुआ। टोक्यो ओलंपिक्स में उनके शानदार प्रदर्शन के बाद सभी लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। उनके पास लोग लगातार शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं मगर वंदना कटारिया ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए किन मुसीबतों का सामना किया है इसपर कोई बात नहीं करना चाहता है। हालांकि वंदना अपने गरीबी और संघर्षों के दिनों को नहीं भूली हैं। उनका कहना है कि उनको बेहद अभाव में अपना बचपन गुजारना पड़ा। हॉकी खेलने के शुरुआती दिनों में भी उनके पास सुख-सुविधाओं का अभाव था। खेल की तैयारी करने के दौरान गरीबी उनकी सबसे बड़ी बाधा बनी।