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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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हरिद्वार: भगवान वो दिन किसी को न दिखाए, जब किसी को अपने कलेजे के टुकड़े से अलग होना पड़े। संतान को खो देने का गम दुनिया का सबसे बड़ा दुख है। हरिद्वार में रहने वाला एक पिता भी ये गम सह नहीं पाया। इकलौते बेटे की बीमारी से मौत हो गई तो पिता भीतर ही भीतर टूटकर रह गया। जब बेटे के जाने का गम सहा नहीं गया तो उसने फांसी लगाकर जान दे दी। बेटे के बाद पिता की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मचा है। घटना काशीपुरा क्षेत्र की है। जहां बीमारी से जूझ रहे बेटे की मौत के सदमे में पिता ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पिता-पुत्र की मौत से मोहल्ले में मातम पसरा है। पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। जानकारी के मुताबिक काशीपुरा निवासी रंजीत धाकड़ (42) रानीपुर मोड़ स्थित एक दुकान पर काम करता था। रंजीत का 15 साल का बेटा सक्षम पैरालाइसिस के अलावा कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहा था।