पहाड़ के दूसरे गांवों की तरह यहां भी सड़क नहीं थी। गांव वाले 6-8 इंच की तंग पगडंडी से गुजरते थे। रास्ता तंग होने के चलते आवाजाही में बहुत दिक्कत होती थी।
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Komal Negi
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Image: Madola village pradhan roshni devi negi jakholi
रुद्रपुर: असली भारत गांवों में बसता है, और इन गांवों को संवारने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर होती है। उन्हें हम गांव का प्रधान कहते हैं, गांव का मुखिया कहते हैं। ग्राम प्रधान चाहें तो गांव की तस्वीर और तकदीर बदलते देर नहीं लगती। अब रुद्रप्रयाग के जखोली क्षेत्र में ही देख लें, यहां की महिला ग्राम प्रधान ने गांव के हित में ऐसा शानदार काम किया है, जिसकी सालों तक मिसाल दी जाएगी। अगस्त्यमुनि विकासखण्ड में एक गांव है मदोला। पहाड़ के दूसरे गांवों की तरह यहां भी सड़क नहीं थी। गांव वाले 6-8 इंच की तंग पगडंडी से गुजरते थे। महिलाएं यहीं से घास-लकड़ी और भारी बोझा लेकर निकलती थीं। ऐसे में रास्ता तंग होने के चलते बहुत दिक्कत होती थी। खेती-किसानी मुश्किल हो गई थी। गांव में जनप्रतिनिधि बदलते रहे, लेकिन रास्ता बनवाने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई। इस बार गांव वालों ने रोशनी देवी नेगी को ग्राम प्रधान चुना।
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रोशनी देवी ने ग्राम प्रधान बनते ही गांव में रास्ता बनवाने की ठान ली। ग्राम प्रधान रोशनी देवी के प्रयासों से यहां मौजूद पगडंडी अब रास्ते की शक्ल ले चुकी है। गांव वाले भी खुश हैं। रास्ता बनाने के लिए ग्राम प्रधान रोशनी देवी की तारीफ कर रहे हैं। रोशनी देवी बताती हैं कि गांव की बसाहट के वक्त पूर्वजों ने यहां पगडंडी बनाई थी। सालों बीत गए, लेकिन ये पगडंडी सड़क नहीं बन सकी। महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को यहां से गुजरने में बहुत परेशानी होती थी। मैं यहां रास्ता बनवाना चाहती थी। इस मुद्दे को मैंने चुनावी घोषणा में भी शामिल किया। हमें खुशी है कि अब यहां पगडंडी की जगह दो से तीन फीट चौड़ा रास्ता बन गया है। जिस पर लोग आराम से आवाजाही कर सकते हैं। मार्ग का निर्माण भूमि सुधारीकरण व नव निर्माण मनरेगा के अंतर्गत सभी ग्रामीणों को रोजगार देकर किया गया है।