कमाल की बात ये है कि Rishikesh में Red sandalwood का पेड़ सालों से था, लेकिन वन विभाग को इसकी जानकारी हाल ही में मिली है।
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कोमल नेगी
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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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Image: Red sandalwood tree in Rishikesh
ऋषिकेश: साउथ फिल्म इंडस्ट्री की सुपरहिट फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ का बज बना हुआ है। इस फिल्म के गाने से लेकर डायलॉग तक खूब कॉपी किए जा रहे हैं। फिल्म में आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों में लाल चंदन की तस्करी की कहानी को दिखाया गया है।
Red sandalwood tree in Rishikesh
ये तो हुई फिल्म की बात, लेकिन Red sandalwood का पेड़ सिर्फ दक्षिण भारत ही नहीं बल्कि एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक अपने Rishikesh में भी है। 15 साल के इस पेड़ की कीमत लाखों रुपये है। जिसकी सुरक्षा वन विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। दरअसल वन विभाग को डर है कि कहीं इस पेड़ पर किसी ‘पुष्पा’ की नजर न पड़ जाए। कमाल की बात ये है कि शहर की आईडीपीएल कॉलोनी में ये पेड़ सालों से था, लेकिन वन विभाग को इसकी जानकारी हाल ही में मिली है। अब इसकी सुरक्षा वन विभाग के द्वारा की जा रही है। आगे पढ़िए
जानकारी के अनुसार लाल चंदन के पेड़ की कीमत 60 से 90 हजार रुपये प्रति किलो है। चीन समेत कई देशों में लाल चंदन की काफी डिमांड है। लाल चंदन का उपयोग दवा के तौर पर किया जाता है। आमतौर पर लाल चंदन के पेड़ आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर मिलते हैं, लेकिन उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी भी लाल चंदन के अनुकूल है। ऋषिकेश की आईडीपीएल कॉलोनी में खड़े लाल चंदन के पेड़ की सुरक्षा पिछले 15 सालों से एक व्यक्ति कर रहा है, अच्छी बात ये है कि अब तक पेड़ पर तस्करों की नजर नहीं पड़ी है। अब तस्करों से पेड़ों को बचाने के लिए मौके पर मंदिर निर्माण कराने की बात कही जा रही है। वन क्षेत्राधिकारी ने वनकर्मियों को Rishikesh के Red sandalwood की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।