चंद्रसेन कश्यप के साथ उनका पूरा परिवार सांपों के संरक्षण के लिए समर्पित है। वो अब तक 20 हजार से भी ज्यादा सांपों को रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ चुके हैं।
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कोमल नेगी
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Image: Story of Chandrasena the snack catcher of Ramnagar
रामनगर: सांप जहरीला हो या न हो, इनसे डर सभी को लगता है, लेकिन रामनगर में रहने वाले एक परिवार की सोच सांपों को लेकर एकदम अलग है। ये परिवार सांपों को पकड़ने के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए समर्पित है। परिवार के मुखिया चंद्रसेन कश्यप पिछले 45 साल से सांपों को संरक्षित करने का काम कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने सेव द स्नेक एंड वाइल्ड लाइफ वेलफेयर सोसायटी भी बनाई है। चंद्रसेन कश्यप के साथ उनका पूरा परिवार सांपों के संरक्षण के लिए समर्पित है।
Story of snack catcher Chandrasena of Ramnagar
चंद्रसेन कश्यप रामनगर के रहने वाले हैं। वो अब तक 20 हजार से भी ज्यादा सांपों को रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ चुके हैं। चंद्रसेन सांपों को पकड़कर जंगल में छोड़ते हैं और सांप के काटे लोगों का इलाज करने में मदद भी करते हैं। विरासत में मिले इस हुनर में उनके बच्चे भी निपुण हो चुके हैं और पिता की ही तरह सांपों को बचाने की कोशिश में जुटे हैं।
चंद्रसेन के बड़े बेटे किशन 25 साल के हैं, और सांपों को रेस्क्यू करने का काम करते हैं। दूसरा बेटा बीए में है, सबसे छोटा बेटा 7वीं में पढ़ता है। उनके बच्चे सर्प विशेषज्ञ बनना चाहते हैं। चंद्रसेन अब तक रेड कोरल कुकरी, ब्लैक हेडेड, ओलिव कीलबैक, बैंडेड कुकरी, बफ स्ट्रिप्ड, कॉमन क्रेट, येलो बैंडेड करैत, रैट स्नेक, स्पेक्टकल्स कोबरा, किंग कोबरा और रसेल वाइपर जैसे सांपों को पकड़कर उनका रेस्क्यू कर चुके हैं। समाजसेवी श्वेता मासीवाल कहती हैं कि रामनगर कॉर्बेट नेशनल पार्क के पास स्थित है, ऐसे में यहां कई प्रजाति के जहरीले सांप निकलते हैं। चंद्रसेन का परिवार अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर दूसरे लोगों की जान बचाता है। ऐसे में उनके पूरे परिवार को वन विभाग की तरफ से इंश्योरेंस की सुविधा मिलनी चाहिए।