उत्तराखंड में बाघ से ज्यादा खतरनाक हुए गुलदार, घर में घुसकर बच्चों को बना रहे निवाला

पिछले साल उत्तराखंड में गुलदार के हमले में 22 लोगों की मौत हुई, जबकि 60 लोग घायल हुए। इस साल भी गुलदार के हमले में अब तक 7 लोग जान गंवा चुके हैं।
Advertisement केदार हिमालय के ऐसे ट्रेक जहां रास्ता खुद आपको चुनता है

बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।

Example Ads Media
uttarakhand leopards: Fear of Leopard in many districts of Uttarakhand
Image: Fear of Leopard in many districts of Uttarakhand

टिहरी गढ़वाल: पहाड़ की जिंदगी में पग-पग पर खतरे हैं। उस पर जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ाई हुई है। गुलदार आबादी वाले इलाकों में घुसकर मासूमों को घर के आंगन से उठा ले जा रहे हैं।

Fear of Leopard in many districts of Uttarakhand

पर्वतीय क्षेत्रों में बाघ और हाथी से ज्यादा खतरनाक गुलदार साबित हो रहे हैं। पिछले साल जंगली जानवरों की वजह से 59 लोगों को जान गंवानी पड़ी, जबकि 225 घायल हुए। इनमें सबसे ज्यादा खतरनाक गुलदार साबित हो रहे हैं। इस अवधि में नरभक्षी गुलदार 22 लोगों को निवाला बना चुके हैं। वहीं, 60 व्यक्ति इनके चंगुल से बमुश्किल बच पाए। इस साल गुलदार के हमले में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है। गुलदार के अलावा बाघ, हाथी, भालू और सुअरों के हमले की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। शनिवार देर शाम घनसाली में गुलदार सात वर्षीय बच्चे को आंगन से उठाकर ले गया। बच्चे का क्षत विक्षत शरीर देर रात्रि को घर से महज 50 मीटर की दूरी पर झाड़ियों में मिला। घटना के वक्त बच्चा शादी समारोह से वापस लौट रहा था।

द्वाराहाट में भी एक 27 वर्षीय युवक के गुलदार के हमले में घायल होने की खबर है। विभागीय अफसर भी इस तरह की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा पा रहे। पिछले दिनों वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वन अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने गुलदार के बच्चों को निवाला बनाने पर डीएफओ और रेंजर को जिम्मेदार ठहराने के निर्देश दिए थे, हालांकि विभाग की सुस्ती टूटती नहीं दिख रही। जंगलों में आग लगने से जंगली जानवरों का खतरा बढ़ गया है। गुलदार के हमले से बचने के लिए आप भी कुछ सुरक्षात्मक उपाय जरूर करें। जंगलों को आग से बचाएं। खेतों में काम करने के लिए समूह में ही जाएं। बच्चों को घर के बाहर शौचालय में रात के समय अकेले न भेजें। स्कूल जाते समय बच्चों को किसी अभिभावक के साथ भेजें। घरों के चारों तरफ झाड़ियां न पनपने दें। साथ ही शाम के वक्त आंगन में रोशनी जलाकर रखें।