केदारनाथ में गंदगी देखकर निराश हुए बॉलीवुड स्टार पंकज त्रिपाठी, कहा- ये मानवता के लिए ठीक नहीं

प्रसिद्ध बॉलीवुड स्टार पंकज त्रिपाठी ने लोगों को किया जागरूक, सोशल मीडिया पर की पहाड़ों पर कूड़ा न फैलाने की अपील
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pankaj tripathi kedarnath: Pankaj Tripathi tweet on the garbage in Kedarnath
Image: Pankaj Tripathi tweet on the garbage in Kedarnath

रुद्रप्रयाग: इन दिनों लाखों की संख्या देश दुनिया से पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं। पहाड़ पर पर्यटन के बड़ा है मगर इससे प्रकृति को सीधे-सीधे तौर पर नुकसान पहुंच रहा है।

Pankaj Tripathi tweets about garbage in Kedarnath

पहाड़ों पर जगह-जगह पर्यटकों द्वारा फेंके गए खाने पीने की चीजों की वजह से भारी मात्रा में गंदगी हो रही है जिससे प्रकृति को भी नुकसान पहुंच रहा है और वहां पर आने वाले यात्रियों को भी कूड़े कचरे की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।।इससे ना केवल पहाड़ दूषित हो रहे हैं बल्कि इससे यह पता लगता है कि मनुष्य प्रकृति के प्रति कितना स्वार्थी है। बात करें उत्तराखंड की तो उत्तराखंड में भी इन इन दिनों चार धाम यात्रा सैकड़ों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं और चार धाम यात्रा पर आ रहे हैं। इसके अलावा उत्तराखंड के कई पर्यटक स्थलों पर भी लाखों की संख्या में पर्यटकों का हुजूम उमड़ रहा है जिस वजह से पहाड़ों पर भारी मात्रा में कूड़ा इकट्ठा हो गया है जो कि जगह-जगह पर फैला हुआ है और पहाड़ों को दूषित कर रहा है।

ऐसे में बॉलीवुड के फेमस अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक किया है। पंकज त्रिपाठी अब तक कई बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं मगर सुपरहिट सीरीज मिर्जापुर सीरीज की वजह से वे लोगों की नजरों में आए हैं। पंकज त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर लोगों को पहाड़ों पर कचरा न फैलाने और साफ रखने की अपील करते हुए लिखा " पहाड़ों पर यात्रा का चलन बढ़ा है। ज़्यादा भीड़ से प्रकृति पर इसका प्रभाव सम्भव है बहुत लोग नहीं समझ पाएँ लेकिन रास्ते में प्लास्टिक का ढेर लगा देना, पहाड़ों को प्लास्टिक से पाट देना कैसे किसी की नहीं चुभता होगा! ये अचंभित करता है, परेशान करता है। यात्रा पर प्लास्टिक कम से कम ले जाएँ। कचरा कूड़ेदान में डालें। प्रशासन नियमित दूरी पर पर्याप्त कूड़ेदान की व्यवस्था करे और इसके प्रयोग को बढ़ावा दे। लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत है। कोई भी समस्या सबसे ख़तरनाक तब है जब आम लोग इसे समस्या माने ही ना। पहाड़ों को चुनौती देना मानवता के लिए ठीक नहीं है। इसकी संवेदनशीलता को गम्भीरता से समझने की ज़रूरत है। "