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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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टिहरी गढ़वाल: सरकारी स्कूलों में मिलने वाली शिक्षा के स्तर को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। हर किसी को लगता है कि हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़ने वाले सफलता की दौड़ में पीछे रह जाते हैं, लेकिन ये बात सच नहीं है।
कड़ी मेहनत और इच्छाशक्ति के दम पर हर चुनौती को पार कर सफलता हासिल की जा सकती है। टिहरी के शैलेंद्र शाह ने यूरोपियन कंट्री (नीदरलैंड) में बतौर रिसर्चर के रूप में चयनित होकर इस बात को सच कर दिखाया है। शैलेंद्र टिहरी गढ़वाल के विकासखंड भिलंगना के अंतर्गत आने वाले बूढ़ाकेदार क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई प्राथमिक विद्यालय सौला में हुई। बाद में उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज विनयखाल से हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई नवोदय विद्यालय से की। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने बीटेक एनआईटी श्रीनगर गढ़वाल से और एमटेक आईआईटी दिल्ली से किया। शैलेंद्र के पिता लोकेंद्र शाह बतौर प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय खवाड़ा बासर में कार्यरत हैं। जबकि उनकी माता रामेश्वरी देवी शाह गृहणी हैं
शैलेंद्र को नीदरलैंड के वैगनिंगन विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान में पीएचडी करने का अवसर मिला है, जो पूरे प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। वो वहां रिसर्चर साइंटिस्ट के तौर पर सेवाएं देंगे। इस पोस्ट के लिए हजारों युवाओं ने आवेदन किया था। शैलेंद्र को भी तमाम परीक्षाओं और इंटरव्यू के दौर से गुजरना पड़ा। कड़ी टक्कर के बीच हजारों युवाओं में से शैलेंद्र को पीएचडी के लिए चुन लिया गया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और जिले में खुशी की लहर है। गांववासियों ने युवा शैलेंद्र की उपलब्धि को क्षेत्र के लिए गौरवान्वित करने वाला पल बताया है। राज्य समीक्षा टीम की ओर से भी शैलेंद्र और उनके परिजनों को शुभकामनाएं। उनकी सफलता पहाड़ के दूसरे युवाओं को भी आगे बढ़ने की राह दिखाएगी।