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नैनीताल: हम बात कर रहे हैं सिमई के पौधे की। यह नैनीताल के ज्योलीकोट, रानी बाग, काठगोदाम, मंगोली खुरपाताल व अन्य क्षेत्रों में देखा जा सकता है।
क्या आप जानते हैं कि यह पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है और कई बीमारियों में लोगों के काम आता है।इसे स्थानीय भाषा में सौं भी कहते हैं। इस पौधे में कई बीमारियों को ठीक करने के गुण हैं, जिस वजह से यह पौधा काफी महत्वपूर्ण है।सिमई का पौधा उत्तराखंड के गर्म क्षेत्र में पाया जाता है. नैनीताल के ज्योलीकोट, रानी बाग, काठगोदाम, मंगोली खुरपाताल व अन्य क्षेत्रों में आसानी से देखा जा सकता है।
यह पौधा कई बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है। जोड़ों के दर्द के लिए इसके पत्तों का तेल इस्तेमाल में लाया जाता है। इस तेल को जॉइंट्स में लगाने से दर्द दूर होता है। वहीं पहाड़ों में इस पौधे से झाड़ने की मान्यता भी बेहद प्रचलित है। उनका मानना है कि जब कभी भी शरीर के किसी हिस्से में हवा पड़ती है यानी वह हिस्सा पैरालाइज होता है तब सौं के पत्तों से उस जगह पर झाड़ा जाता है। इसे 3-4 दिन तक लगातार करने से वह ठीक हो जाता है।