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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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अल्मोड़ा: प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती। मीमांशा जोशी ने इस बात को सच साबित कर दिया।
16 साल की मीमांशा ने बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स-2022 के कराटे चैंपियनशिप में देश के लिए रजत और कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उत्तराखंड के लिए ये मौका बेहद खास है, क्योंकि मीमांशा उत्तराखंड की रहने वाली हैं। वर्तमान में वो गाजियाबाद में रह रही हैं। शुक्रवार को इंदिरापुरम के सेंट थॉमस स्कूल में मीमांशा का जोरदार स्वागत हुआ। मीमांशा कक्षा 11 की छात्रा हैं। वो खेलों के साथ-साथ पढ़ाई में भी हमेशा अव्वल रही हैं। मीमांशा मूलरूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित सुभाषनगर की रहने वाली हैं। आगे पढ़िए
परिवार में पिता हितेश जोशी, मां नमिता के अलावा बहन गर्विता हैं, ये सभी मीमांशा की उपलब्धि से बेहद खुश हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में मीमांशा ने जूनियर 48 किलोग्राम भार वर्ग में रजत और कांस्य पदक जीता। उन्होंने कई देशों की खिलाड़ियों को मात देकर ये पदक हासिल किए। मीमांशा ने बताया कि अब वह एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए पदक जीतना चाहती हैं। मीमांशा इंदिरापुरम के सेंट थॉमस स्कूल में पढ़ती हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके शानदार प्रदर्शन से स्कूल में भी खुशी का माहौल है। स्कूल प्रबंधन ने मीमांशा की 12वीं तक की पढ़ाई निशुल्क कर दी है। साथ ही उपहार के तौर पर उन्हें लैपटॉप भेंट किया है। राज्य समीक्षा टीम की ओर से मीमांशा को ढेरों शुभकामनाएं। उनकी सफलता का सफर यूं ही जारी रहे, हम यही कामना करते हैं।