परिजनों का कहना है कि पुलिस ने केदार को लेकर झूठी कहानी बनाई है। अगर वो गंगा में कूदा था तो उसका शव बरामद क्यों नहीं हो पाया।
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कोमल नेगी
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Image: Uttarakhand Kedar Bhandari missing case
उत्तरकाशी: पुलिस से डरकर गंगा नदी में छलांग लगाने वाले केदार भंडारी का अब तक पता नहीं चल सका है।
Kedar Bhandari missing case
यह घटना 22 अगस्त की है। घटना को 3 महीने हो चुके हैं, लेकिन केदार जिंदा है या नहीं, इस बारे में अब तक कोई सूचना नहीं मिल पाई है। मामले में ऋषिकेश पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच गुरुवार को केदार भंडारी के पिता लक्ष्मण भंडारी और मां डबरी देवी देहरादून के गांधी पार्क में धरने पर बैठे। डबली देवी रोते हुए बस यही सवाल पूछ रही थी कि पुलिस उन्हें बताए कि उनका बेटा कहां है। परिजनों ने बताया कि केदार भंडारी कोटद्वार में अग्निवीर भर्ती में गया था। 20 अगस्त को वह ऋषिकेश में था। फोन पर बातचीत के दौरान उसने ऋषिकेश घूमने की बात कही थी, इसके बाद दो दिन तक उनका केदार से संपर्क नहीं हो सका।
22 अगस्त को पुलिस ने परिजनों को फोन किया और उन्हें बताया कि केदार को लक्ष्मण झूला पुलिस ने चोरी के इल्जाम में पकड़ा था, लेकिन उसने भागकर गंगा में छलांग लगा दी। यह कहानी पुलिस की बनाई हुई है और हमें इस पर जरा भी भरोसा नहीं है। अगर केदार गंगा में कूदा था तो उसका शव बरामद क्यों नहीं हो पाया। और अगर चोरी हुई थी तो उसकी तहरीर कहां है पुलिस बताए। कांग्रेस पार्टी ने भी धरने को समर्थन दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के नेतृत्व में कांग्रेसी धरने पर बैठे। इस मौके पर कांग्रेस नेता ने कहा कि अंकिता भंडारी और केदार भंडारी के मामले में उत्तराखंड शर्मसार हुआ है। पहाड़ के बच्चों का कोई रखवाला नहीं रह गया है। उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। अधिवक्ता पंकज छेत्री ने कहा मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। धरने के दौरान यूकेडी नेता उत्तरा बहुगुणा व शिवप्रसाद सेमवाल आदि मौजूद रहे।