उत्तराखंड: 5 साल की उम्र में पिता ने साथ छोड़ा, अब सेना में लेफ्टिनेंट बना जैती गांव का बेटा

5 साल की उम्र में हो गया था पिता का निधन, मेहनत‌ से सेना में लेफ्टिनेंट बने अल्मोड़ा के सुंदर सिंह बोरा
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प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

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Almora Sunder Singh Bora lieutenant: Almora Sunder Singh Bora became Army Officer
Image: Almora Sunder Singh Bora became Army Officer

अल्मोड़ा: कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों। यह पंक्तियां सटीक बैठती हैं अल्मोड़ा के दाड़िमी (जैती) के सुन्दर सिंह बोरा के ऊपर।

Almora Sunder Singh Bora became Army Officer

उन्होंने आज लेफ्टिनेंट के पद पर तैनाती ली। 5 साल की बेहद कम उम्र में पिता ने उनका हाथ हमेशा हमेशा के लिए छोड़ दिया। मां ने हिम्मत नहीं हारी। अपने पति के वियोग में उन्होंने अपने बेटे की किस्मत संवारी। सुंदर सिंह बोरा ने 2015 में इंजीनियरिंग कोर में सिपाही के पदपर भारतीय सेना जॉइन की और लेफ्टिनेंट के पद तक संघर्ष का सफर तय किया। सफर आसान नहीं था, चुनौतियां थीं, मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आज अपनी मेहनत से वे सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं। उनकी प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर वह दसवीं तथा बारहवीं की शिक्षा हाई स्कूल इंटरमीडिएट सर्वोदय इंटर कॉलेज जयंती से उत्तीर्ण की।

वे प्रतिदिन पैदल 6 किमी चलकर विद्यालय आते थे। तब कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते सुंदर पैदल ही आना जाना करते थे।2015 में बंगाल इंजीनियर कोर में सिपाही के पद पर भर्ती होकर 2018 में आर्मी कैडेट कॉलेज में 3 साल वह 1 साल आईएमए की पढ़ाई करके अब पैराशूट रेजीमेंट में लेफ्टिनेंट के पद पर बेंगलुरु में तैनाती मिली है। महज 5 साल के थे सुंदर सिह बोरा जब उनके पिता राजेन्द्र सिंह बोरा का निधन हो गया था। चार भाई-बहनों को उनकी माता कलावती देवी ने पाला पोसा। परिवार में सबसे छोटे सुंदर बोरा आर्मी कैडेट कॉलेज के 69 अफसर कैडेटस में सबसे बेस्ट मोटिवेटेड अफसर कैडेट रहे हैं। उनके लेफ्टिनेंट बनने के बाद से ही क्षेत्र में जश्न का माहौल छा गया है और उनके परिजनों में भी उल्लास देखने को मिल रहा है।