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देहरादून: पेपर लीक मामले ने यूकेएसएसएससी की खूब फजीहत कराई। पहले स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में घपला सामने आया।
फिर वन दरोगा और सचिवालय रक्षक भर्ती में हुए पेपर लीक की पोल खुली। यूकेएसएसएससी की तमाम भर्तियों पर सवाल उठे तो सभी भर्तियों की जिम्मेदारी उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पास चली गईं। अब यूकेएसएसएससी अपने दामन पर लगे दाग को धोने की कोशिश में जुट गया है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) नए सिरे से नई भर्तियां शुरू करने जा रहा है। इस बार किसी तरह का घपला न हो, इसके लिए आयोग ने सख्त इंटरनल एसओपी (मानक प्रचालन प्रक्रिया) और गाइडलाइन जारी की है। जिसमें नकल रोकने के लिए सख्त इंतजाम किए गए हैं। बता दें कि भर्ती घपला सामने आने के बाद सरकार ने यूकेएसएसएससी की जिम्मेदारी पूर्व आईपीएस जीएस मर्तोलिया को सौंप दी थी। उन्होंने हर पहलू की गहराई से जांच की और अब सुरक्षित परीक्षा के लिए सख्त इंटरनल एसओपी जारी कर दी गई है।
मार्च से आयोग पुरानी रद्द परीक्षाओं के री-एग्जाम के साथ ही नई भर्तियों की विज्ञप्ति भी जारी करेगा। आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने बताया कि समूह-ग की भर्तियों को टू-टियर यानी प्री और मेन के तौर पर कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यह अभी लंबित है। यूकेएसएसएससी की पहल पर शासन में नकल अध्यादेश तैयार हो रहा है। इस कानून के लागू होने के बाद न केवल नकल माफिया बल्कि पेपर छापने वाली एजेंसी और एग्जाम में ड्यूटी करने वाले सरकारी अफसरों के लिए भी सख्त नियम होंगे। इससे नकल माफिया के हौसले पस्त होंगे। सभी अधिकारियों से लेकर पेपर प्रकाशित करने वालों तक को आयोग की एसओपी का पालन करना होगा। बता दें कि यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में अब तक 45 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। घपला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने समूह-ग की प्रचलित 23 भर्तियों की जिम्मेदारी राज्य लोग सेवा आयोग को सौंप दी थी। इसके तहत राज्य लोक सेवा आयोग कैलेंडर जारी कर भर्तियां करा रहा है।